जोधपुर: राजस्थान के जोधपुर के चर्चित मेहरानगढ़ हादसे को लेकर सरकार 11 साल बाद जागी है. राज्य में बड़े-बड़े मेलों में होने वाले हादसों को रोकने के लिए सरकार ने व्यवस्था के निर्देश जारी किए हैं. गृह विभाग से सभी जिला कलेक्टरों को एडवाइजरी जारी की गई है.

राजस्थान में 11 साल पहले जोधपुर के मेहरानगढ़ दुर्ग के चामुंडा माता मंदिर में नवरात्र मेले के दौरान खूनी भगदड़ को कौन भूल सकता है. नवरात्र उत्सव जैसे मौके पर 216 श्रद्धालुओं की मौत ने पूरे राजस्थान को हिलाकर रख दिया था. वहीं राजस्थान में त्योहार और मेलों में किसी तरह का हादसा नहीं हो इसको लेकर गृह विभाग ने सभी जिला कलेक्टरों को एडवाइजरी जारी की है. 

मेला स्थलों के निरीक्षण के लिए दल गठित किया जाएगा. जिसमें इंजीनियर, डॉक्टर, प्रशासक और पुलिस अधिकारी शामिल होंगे, जो मेला स्थल की बुनियादी कमियों का पता लगाकर हादसे को रोकने का उपाय करेंगे. एडवाइजरी में विभिन्न मेलों के दौरान सुरक्षा को लेकर भी निर्देश दिए गए हैं. उनमें रामदेवरा, गोगामेडी जैसे बड़े मेलों में बड़े और मध्यम वाहनों के प्रवेश बंद होने के निर्देश दिए गए है. यहां तक कि अजमेर उर्स की तरह पार्किंग स्थल चिह्नित करने की बात भी कही गई है. वहीं परशुराम महादेव मंदिर जैसे स्थानों पर भूस्खलन की आशंका रहती है इसलिए प्रशासन को समय पर उचित कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं. परशुराम महादेव मंदिर के रास्ते में लोहे की मजबूत बेरिकेडिंग के निर्देश दिए गए हैं. 

ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती की दरगाह के चारों और फायर ब्रिगेड को पहुंचने के लिए रिंग रोड के निर्माण की सलाह दी है. मेलों की मॉनिटरिंग के लिए ऊंची जगह से दूरबीन सहित सुरक्षाकर्मी तैनात करने, धार्मिक मेलों में आरती का समय निश्चित करने के निर्देश दिए हैं. 

वहीं गृह विभाग ने जिला कलेक्टरों से मेला के दौरान उचित व्यवस्था करने के साथ रिपोर्ट सरकार को देने के निर्देश भी दिए हैं. उम्मीद हैं सरकार के इस कदम के बाद मेले के दौरान हादसे पर अंकुश लग सकता है.