अयोध्या. राम जन्मभूमि (Ram Janmbhumi) पर भव्य दिव्य मंदिर निर्माण को लेकर विश्व हिंदू परिषद (VHP) के तैयार मॉडल पर रामालय न्यास ट्रस्ट (Ramalaya Nyas Trust) के सचिव अविमुक्तेश्वरानंद की टिप्पणी के बाद अब विश्व हिंदू परिषद और संत समाज ने नाराजगी व्यक्त की है. विश्व हिंदू परिषद और अयोध्या के संत समाज ने अविमुक्तेश्वरानंद के ऊपर मंदिर निर्माण में बाधा पहुंचाने का आरोप लगाया है. जगतगुरु वासुदेवानंद सरस्वती ने रामालय ट्रस्ट के दावों को खारिज करते हुए कहा कि माननीय सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि भारत सरकार ट्रस्ट बनाए और वही ट्रस्ट मंदिर का निर्माण करेगा. उसी के अनुसार गठन कर मंदिर का निर्माण हो.
उन्होंने कहा कि रामालय ट्रस्ट एक व्यक्तिगत संस्था है, उसे हिंदू समाज का कोई संबंध नहीं. वह एक राजनैतिक स्पर्धा है. वहीं उन्होंने विहिप द्वारा तैयार मॉडल का समर्थन हुए करते हुए कहा कि इस मॉडल के लिए भारत का प्रत्येक नागरिक समर्पित है. इस पर सुप्रीम कोर्ट में भी चर्चा रही है इसलिए इसी मॉडल के अनुरूप मंदिर का निर्माण होना चाहिए. उन्होंने कहा कि अगर चाहें तो इसका विस्तारीकरण हो, साथ ही ट्रस्ट के निर्माण को लेकर कहा कि हम यही चाहते हैं कि राम जन्मभूमि न्यास के सदस्य और राम मंदिर निर्माण के ट्रस्ट में शामिल साथी और अन्य बुद्धिजीवियों को शामिल किया जाए.
विश्व हिंदू परिषद ने किया पलटवार
वहीं विश्व हिंदू परिषद ने अविमुक्तेश्वरानंद पर पलटवार करते हुए कहा है कि यह विवाद का विषय नहीं है. अयोध्या में राम जन्मभूमि पर भव्य मंदिर निर्माण को लेकर कार्य पिछले 30 वर्षों से किया जा रहा है. आज जिस मॉडल को लेकर जन-जन तक आंदोलन हुआ इसे लागू उन्होंने अपने रक्त से सिंचित किया. आज उस मॉडल को नकारा नहीं जा सकता. रामालय ट्रस्ट समाज को भ्रमित करने का काम कर रहा है, जो दुर्भाग्यपूर्ण है. अयोध्या के संत समाज धर्म आचार्यों ने पूर्ण रूप से इस मॉडल पर मोहर लगाई है. विहिप के शरद शर्मा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट राम मंदिर के पक्ष में फैसला आने के बाद इस प्रकार के तमाम लोग सामने आ रहे हैं. यही लोग सिर्फ राम मंदिर निर्माण में बाधा पहुंचाने का काम कर रहे हैं. इन लोगों का मंदिर निर्माण से कोई भी संबंध नहीं है. भगवान श्रीराम का भव्य मंदिर कोई व्यक्ति नहीं बल्कि समाज द्वारा बनाया जाना है.
रामालय न्यास की तरफ से ये दिया गया था बयान
बता दें रामालय न्यास के सचिव जगद्गुरु स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के शिष्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने विश्व हिंदू परिषद पर हमलावर होते हुए कहा कि संतों की पूर्व में राय थी कि प्लाट मिल जाए, तब नक्शा बनवाया जाए. लेकिन उसके बावजूद पत्थर खरीद कर उसका मॉडल बनवा दिया गया. अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि जो मौजूदा मॉडल है, वह 130 फीट ऊंचा है और अमित शाह कह रहे हैं कि जो भगवान राम का मंदिर का शिखर होगा, वह आकाश शिखर का होगा.
राम मंदिर मॉडल पर उठाए सवाल
राम जन्मभूमि न्यास की कार्यशाला में रखे मंदिर मॉडल पर प्रश्नचिन्ह उठाते हुए कहा कि इसमें राम भक्तों की भावनाएं शामिल हैं. इसलिए इस मॉडल को उसमें शामिल जरूर किया जाएगा लेकिन इसको और भव्यता और दिव्यता दी जाएगी. वहीं, अयोध्या एक्ट के आधार पर ट्रस्ट में भागीदारी का दावा भी अविमुक्तेश्वरानंद ने ठोका है. उन्होंने कहा कि सरकार को पत्र भेज दिया गया है. साल 1993 के अधिग्रहण कानून के अनुसार इसे किसी ट्रस्ट को देना है. अब जो दूसरे टेस्ट हैं वह उस रूप में नहीं है. अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि यह मंदिर 500 वर्षों के संघर्ष के बाद मिला है तो यह हमारी प्राथमिकता होगी कि इसका जो स्वरूप हो और भव्य और दिव्य हो.