ठगी की सोसायटी:जबलपुर सहित कई शहरों में डीजीआर नाम से सोसायटी के ब्रांच खोेले, अधिक ब्याज का झांसा देकर 49 लाख रुपए हड़पे
 

जबलपुर ईओडब्ल्यू आफिस
जबलपुर ईओडब्ल्यू ने सोसायटी के संस्थापक और सह डायरेक्टर के खिलाफ शुरू की जांच
ईओडब्ल्यू ने धोखाधड़ी, अमानत में ख्यानत व साजिश रचने का प्रकरण किया दर्ज

एफडी, आरडी और मंथली इनकम स्कीम में पैसे निवेश करने पर जल्द मेच्योरिटी और अधिक ब्याज का लालच देने वाली सोसायटी निवेशकों के 49 लाख रुपए हड़प गई। जबलपुर के 14 पीड़ितों ने ईओडब्ल्यू (आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ) में मामले की शिकायत की। एक वर्ष पहले हुई शिकायत की जांच के बाद ईओडब्ल्यू ने सोसायटी के संस्थापक और सह डायरेक्टर के खिलाफ धारा 409 (अमानत में ख्यानत), 420 (धोखाधड़ी), 120 बी (आपराधिक षड्यंत्र की साजिश रचना) का प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
2012 में भोपाल में बनाई थी सोसायटी
भोपाल में प्रीमियम टाॅवर जेके हाॅस्पिटल के पास रहने वाले उमेश गुप्ता ने 16 अक्टूबर 2012 को डीजीआर क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसायटी लिमिटेड के नाम से एक फर्म का पंजीयन कराया था। सोसायटी में सैनिक सोसायटी गुप्तेश्वर वार्ड निवासी अविनाश चौधरी को सह डायरेक्टर व जबलपुर का जोनल मैनेजर बनाया था। फर्म ने भोपाल, जबलपुर, सीधी, सतना, रीवा, मऊगंज जैसे स्थानों पर अपने ब्रांच खोले। 2013 से 2017 के बीच में इस फर्म ने लोगों से अपनी जमा पूंजी निवेश कराई थी।
 

तीन तरह की स्कीम में निवेशकों का पैसा कराया था निवेश

फर्म ने आम लोगों को लुभावने व आकर्षक ब्याज दरों पर एफडी ( फिक्स डिपाजिट) एमआईएस (मंथली इनकम स्कीम) और आरडी में पैसे निवेश कराए। सोसायटी के लोगों को ही एजेंट बनाया। शुरू में निवेशकों की मेच्योरिटी पर पैसे भी लौटाए गए। जब विश्वास बढ़ने पर अधिक लोगों ने पैसे निवेश कर दिए और मेच्योरिटी का वक्त आया तो वर्ष 2017 में सोसायटी अचानक बंद कर दी गई।
जबलपुर में 18 पीड़ितों ने दर्ज कराई शिकायत
इस सोसायटी में पैसे निवेश करने वाले पीड़ित दो वर्षों तक भटकते रहे। 18 लोगों ने 2019 में प्रकरण में ईओडब्ल्यू में मामले की शिकायत दर्ज कराई। ईओडब्ल्यू ने मामले की जांच में निवेशकों के साक्ष्य को पुख्ता पाया। सभी पीड़ितों ने कंपनी के तीनों स्कीम में 49 लाख, नौ हजार 473 रुपए जमा किए। मेच्योरिटी पर उन्हें अधिक राशि मिलती पर भुगतान किए बिना ही सोसायटी ब्रांच समेट कर भाग गई।
 

जबलपुर में इन लोगों से हुई ठगी

मधु वाजपेयी, आशीष मित्रा, खुशाल पांडुरंग रंगारी, उसकी पत्नी मीना रंगारी, सायमन कुजूर, मेघा जैन, शेख करीब, विवेकानंद मरकाम, प्रद्युत राय, चंद्रप्रकाश गुप्ता, रामनाथ बर्मन, कल्लू तिवारी, उनकी पत्नी रुक्मणि तिवारी, रतना चक्रवर्ती, उनके पति अजीत कुमार चक्रवर्ती, संतोष कुमार सिंगरौल, उनके पिता विजय सिंह सिंगरौल और हरमीत कौर भाटिया ने एफडी में 21 लाख 8 हजार 273 रुपए, आरडी में 12 लाख एक हजार 200 रुपए और एमआईएस में 16 लाख रुपए जमा किए थे।
 

सबूत भी नष्ट कर दिए

उमेश और उसके सह डायरेक्टर अविनाश चौधरी ने सबूत भी नष्ट कर दिया है। कई निवेशकों की मूल सर्टिफिकेट व मूल पास बुक मेच्योरिटी व एंट्री कराने के नाम पर छल से अपने पास रख लिया। इसके बाद निवेशकों को दिया ही नहीं। आरोपियों ने सोसायटी के नियमों का भी उल्लंघन किया। बिना सूचना दिए सोसायटी का पता बदल लिया। सोसायटी की एक भी वार्षिक आम सभा नहीं हुई। प्रतिवर्ष बोर्ड की चार मीटिंग बुलाने के नियम का भी पालन नहीं किया गया। इस तरह सोसायटी कभी अस्तित्व में आई ही नहीं।
 

ठगी का लंबा है नेटवर्क

ईओडब्ल्यू एसपी देवेंद्र सिंह राजपूत ने बताया कि सोसायटी के ठगी का लंबा नेटवर्क है। अभी सिर्फ जबलपुर के 18 लोगों की जांच में 49 लाख की ठगी का प्रकरण सामने आया है। जबकि सोसायटी ने भोपाल सहित अन्य जिलों में भी अपने ब्रांच खोले थे। वहां भी बड़ी संख्या में लोगों ने निवेश किए थे। उनके भी पैसे सोसायटी ने नहीं लौटाए हैं। जांच में अन्य पीड़ितों के मामले जुड़ते जाएंगे।