आप कितनी भी बेहतर वित्तीय योजना बना लें लेकिन कर्ज लेने की जरूरत कभी कभी आपको पड़ ही जाती है। बैंक और गैर-वित्तीय कंपनियां (एनबीएफसी) कर्ज के लिए काफी पड़ताल के बाद कर्ज देती हैं। इसे अवसर के रूप में देखकर ऑनलाइन कर्ज देने वाली कंपनियां (फिनेटक) आप को सिर्फ 60 मिनट में कर्ज की पेशकश कर 360 फीसदी तक ब्याज वसूल रही हैं। आसान सा दिखने वाला यह कर्ज कई बार आपके लिए मुसीबत बन जाता है।

कर्ज भुगतान में देरी या चूक पर फिनटेक धमकी देती हैं और कुछ मामलों में घर पर बाउंसर भेजने की भी बात करती हैं। इसके अलावा अन्य तरीके अपनाकर परिवार और समाज में बदनाम करने की भी धमकी देती हैं। इन फिनटेक का शिकार ज्यादातर कॉलेज छात्र या युवा लोग होते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इन फिनेटक की नजर भारत के 45 करोड़ युवा आबादी पर जो आसानी से स्मार्टफोन का उपयोग करता है। बैंक या एनबीएफसी आपको कर्ज देती हैं तो उनका ब्याज फीसदी के रूप में तय होता है यानी 10 फीसदी या अन्य तय फीसदी। लेकिन फिनटेक हर कर्ज पर एक तय राशि ब्याज के रूप में लेती हैं जो ज्यादा महंगा होता है। एक कंपनी 15 हजार रुपये कर्ज 15 दिन के लिए देती है और 16वें दिन 15,125 रुपये ब्याज समेत वसूलती है। फीसदी के रूप में देखें तो यह 0.5 फीसदी प्रति दिन और 180 फीसदी सालाना हुआ जो बेहद ऊंचा है।