भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार को शुरुआती तेजी के बाद भारी गिरावट दर्ज की गई। निवेशकों की पूंजी में भारी कमी आई है और अधिकांश प्रमुख सूचकांक लाल निशान में बंद हुए हैं। आइए इस पूरी खबर को मुख्य बिंदुओं के जरिए समझते हैं:

बाजार में भारी गिरावट और सेंसेक्स-निफ्टी का हाल

मंगलवार को शुरुआती उछाल के बाद भारतीय शेयर बाजार में बड़ी गिरावट आई। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का सेंसेक्स सात सौ अठत्तर अंक से अधिक टूटकर चौहत्तर हजार तीन दशमलव बयासी पर बंद हुआ। वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी तेईस हजार एक सौ पचास के स्तर से नीचे आ गया और तेईस हजार एक सौ अठारह दशमलव साठ पर बंद हुआ। इस गिरावट के कारण निवेशकों के करीब सात लाख करोड़ रुपये डूब गए। इसके अलावा, अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया भी दो महीने की सबसे बड़ी गिरावट के साथ पचानवे दशमलव छियानवे प्रति डॉलर पर बंद हुआ।

बाजार में गिरावट के पांच प्रमुख कारण

  • बढ़ती बॉन्ड आय (बॉन्ड यील्ड) ने निवेशकों की चिंताएं बढ़ा दीं।

  • अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में वृद्धि की उम्मीदें।

  • ईरान और अमेरिका के बीच चल रहा भू-राजनीतिक संघर्ष।

  • कच्चे तेल की कीमतें बढ़कर एक सौ आठ डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच जाना।

  • आईपीओ में अत्यधिक उछाल और तरलता का दबाव।

किन क्षेत्रों में रहा सबसे ज्यादा नुकसान?

बाजार में कमजोरी व्यापक रूप से फैली रही। बैंकिंग, वित्तीय सेवाएं, उपभोक्ता, स्वास्थ्य सेवा, सीमेंट, रियल्टी और धातु सूचकांकों में भारी बिकवाली देखने को मिली। हालांकि, इसके विपरीत एफएमसीजी और सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) क्षेत्रों ने बेहतर प्रदर्शन किया और इनमें मजबूत खरीदारी दर्ज की गई।

वैश्विक बाजारों का हाल

भारतीय बाजार की तरह वैश्विक बाजारों में भी कमजोरी का रुख रहा। स्टॉक्स यूरोप 600 में शून्य दशमलव आठ प्रतिशत की गिरावट आई। इसके अलावा, अमरीकी बाजार के एसएंडपी 500 फ्यूचर्स, नैस्डैक 100 फ्यूचर्स और डाउ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज फ्यूचर्स में भी गिरावट दर्ज की गई। एमएससीआई एशिया पैसिफिक और इमर्जिंग मार्केट्स इंडेक्स में भी एक-एक प्रतिशत की कमजोरी देखी गई।