जयपुर. राजस्थान में पक्षियों का स्वर्ग कहा जाने वाले केवलादेव (Kewaladev Bird Sanctuary) इन दिनों देसी विदेशी पक्षियों (Birds) की आमद से गुलजा़र है. सर्दी की बढ़ती धमक के साथ ही केवलादेव घना पक्षी विहार में माहौल पक्षियों मधुर कलरव से गूंज उठा है. अक्टूबर से फरवरी तक केवलादेव का पक्षियों का सीजन होता है. दिसंबर में सर्दी बढ़ने के बाद पक्षियों की आवक पूरी चरम पर होती है. गौरतलब है कि केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान एक विश्व विख्यात पक्षी अभयारण्य है. इसको पहले भरतपुर पक्षी विहार (Bharatpur) के नाम से जाना जाता था. इसमें हजारों की संख्या में दुर्लभ प्रजाति के स्थानीय और प्रवासी पक्षी पाए जाते हैं. यहां साईबेरिया, मंगोलिया, यूरोप, अफ्रीका से पक्षी सर्दियों के मौसम में आते हैं. यहां सैंकड़ों प्रजातियों के पक्षियों को देखा सकता है.
केवालादेव को 1984 में घोषित किया जा चुका है विश्व धरोहर
पक्षी विशेषज्ञ हर्षवर्धन ने कहा कि साल अच्छी बारिश के बाद केवलादेव में पानी की अच्छी आवक हुई है. इसके चलते यहां इस साल पक्षियों की भी अच्छी आवक हो रही है. केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान को 1971 में संरक्षित पक्षी अभयारण्य घोषित किया गया था और बाद में 1984 में इसे 'विश्व धरोहर' भी घोषित किया गया.
यहां पर्यटक कर सकते हैं इन पशु, पक्षियों के दर्शन
केवलादेव पक्षी विहार अपने आप में एक अजूबा है. केवलादेव मानव निर्मित झील है. यहां पक्षियों के लिए बेहतरीन माहौल तैयार किया गया है. इस 29 वर्ग किलोमीटर के छोटे से वेटलेंड में, छोटी झील, दलदलीय क्षेत्र, ग्रासलैंड, सूखे वुडलैंड और पानी के वुडलैंड मौजूद हैं. यहां आने वाले पक्षियों की 366 प्रजातियां रिकॉर्ड की जा चुकी है. यहां 379 किस्म के फूल पाए जाते हैं. इस झील में 50 से ज्यादा मछलियों की प्रजातियां भी मौजूद हैं. यहां 13 प्रजाति के सांप, 5 प्रजाति की छिपकलियां, 7 प्रजाति के मेंढक और सात प्रजाति के कछुए यहां पाये जाते हैं