भोपाल.मध्य प्रदेश में सरकारी मकान अलॉट करने की प्रक्रिया में फर्ज़ीवाड़ा का मामला सामने आया है. संपदा संचालनालय (Directorate Of Estate) के एक बाबू द्वारा पैसे वसूलकर पुलिस वालों को नंबर आने से पहले ही मकान अलॉट करने की बात सामने आई है. यह फर्ज़ीवाड़ा शिवराज सरकार के दौरान किया गया, लेकिन कमलनाथ सरकार में यह पकड़ में आया. बाबू राहलु खरते अब जेल में है. अब तक की जांच में 96 मामले पकड़ में आए हैं, जिन्हें समय से पहले सरकारी मकान अलॉट किया गया. सभी को नोटिस देकर मकान खाली कराए जा रहे हैं.

सरकारी मकान अलॉटमेंट घोटाले में पुलिस वालों ने सबसे ज़्यादा मकान अलॉट कराए. जांच में 96 पुलिसकर्मियों के फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है. इस खुलासे के बाद संपदा संचालनालय ने उन सभी पुलिसकर्मियों को नोटिस जारी कर दिए हैं कि वो जल्द से जल्द मकान खाली कर दें. पिछले चार साल में पुलिस वालों को मकान अलॉट करने की जांच की जा रही है.

मकान खाली करने का नोटिस

इन कर्मचारियों को अगले महीने तक मकान खाली करना होगा. पिछले साल संपदा संचालनायल की जांच में सामने आया है कि गृह विभाग में पोस्टेड एक बाबू राहुल खरते ने मुख्यमंत्री की जाली नोटशीट बनाकर पुलिस वालों को सरकारी मकान अलॉट कर दिए. इस पर जहांगीराबाद पुलिस ने आरोपी खरते पर एफआईआर दर्ज कर गिरफ्तार किया था. खरते जेल में बंद है.


दो साल में अलॉट मकानों की जांच में खुलासा

संपदा संचालनालय ने सबसे पहले 2018 और 2019 में पुलिस वालों को मकान अलॉट करने की जांच की. इसमें पता चला कि 2018 में 25 और 2019 में 66 मकान इस तरह फर्ज़ीवाड़ा कर अलॉट किए गए. अब ऐसे मकान लेने वाले पुलिस कर्मचारियों को संपदा संचालनालय ने नोटिस जारी किए हैं. इन पुलिस वालों ने किस तरीके से आरोपी लिपिक खरते के साथ मिलकर मकान अलॉट कराए या किसी के कहने पर खरते ने ये मकान अलॉट किए थे. इन तमाम बिंदुओं पर अब विभाग जांच कर रहा है. विभाग ने तमाम जानकारी पुलिस को भेजी है.

अब होगी जांच

साल 2018 और 2019 के अलॉटमेंट की जांच में ये धोख़ाधड़ी पकड़ी गई. संपदा संचालनालय अब पिछले 4 साल 2014 से 2017 के बीच पुलिस वालों को मकान अलॉटमेंट की जांच कर रही है. खरते लंबे समय से विभाग में पदस्थ था. इसलिए आशंका है कि मकान आवंटन में ये धोखाधड़ी काफी समय से चल रही होगी. संपदा गृह विभाग के अंतर्गत आता है. पता चला है कि खरते एक मकान अलॉट करने के 70 हजार से लेकर एक लाख या उससे ज्यादा पैसा वसूलता था.