लखनऊ. देश-प्रदेश में सरकार एक ओर किसानों (Farmers) की आय दोगुनी करने का दावा कर रही है. तो वहीं दूसरी ओर उत्तर प्रदेश में गन्ना विभाग (UP Sugarcane Department) किसानों की मूलभूत समस्य़ाओं का समाधान आजतक नहीं कर सका है. लेकिन इतना जरूर है कि विभाग यूपी के गन्ना किसानों को ढोल और थाली बजाकर अपने गन्ने की फसल को बचाने की सलाह जरूर देता नजर आ रहा है.

टिड्डी के हमले को लेकर हाईअलर्ट

दिलचस्प बात ये है कि उत्तर प्रदेश के गन्ना आयुक्त संजय़ भूसरेड्डी ने यूपी में नहीं बल्कि गुजरात में टिड्डी नामक कीट के प्रकोप की ख़बरों का संज्ञान लिया. जिसके बाद यूपी में भी गन्ने की फसल पर टिड्डी के संभावित आक्रमण को विफल करने के लिये हाई अलर्ट जारी कर दिया गया. टिड्डी से बचाव के उपायों की जानकारी अख़बारों, पम्पलेट्स- हैंडबिल मे छपवाने का साथ ही वाँल पेंटिग कराकर भी किसानों को दी जा रही है.


ढोल-थाली बजाकर फसल बचाए

गन्ना आयुक्त संजय़ भूसरेड्डी के मुताबिक ‘टिड्ड़ी एक साथ बडी संख्या में आक्रमण कर फसल को बेहद कम समय में चट कर जाती है. इनका आक्रमण होने के बाद फसल को बचाना बेहद मुश्किल होता है. इसलिए पहले से ही तैयार रहकर इनसे बचाव किय़ा जा सकता है. टिड्डी से बचाव के लिए खेतों की मेढ़ों से घास की साफ-सफाई आवश्यक है, क्योकि टिड्डी घास में ही अंडे देती है. टिड्ड़ी शोर मचाने से डर जाती है. ऐसे में इनके हमले के दौरान गन्ना किसानों को ढोल और थाली आदि बजाना चाहिए, ताकि वे डर कर भाग जाए.’

किसानों ने उठाए सवाल

गन्ना आयुक्त की इस सलाह और निर्देश से जुड़े पत्र को गन्ना विभाग की फेसबुक जैसी सोशल साइट्स पर भी अपलोड किया गया है. जिस पर विजय प्रताप सिंह कमेंट कर लिखते हैं कि ‘सरकार को भटकाने का काम छोड़कर गन्ना आपूर्ति एवं भुगतान पर महोदय ध्यान केंद्रित करने का कष्ट करें. घटतौली अलग हो रहा है. बजाज का 2018-19 के साथ साथ 2019- 2020 का गन्ना मूल्य भुगतान सुनिश्चित कराने का कष्ट करें. जबकि महेन्द्र मनी अपने कमेंट में लिखते है कि ‘अच्छा कार्य है पर पहले तो हमारे यहां प्रकोप होता नहीं है और यदि हुआ तो थाली बजाने के लिए आदमी नहीं मिल पाएंगे.’

किसानों में नाराजगी

दरअसल, मौजूदा पेराई सत्र के करीब 3 माह बीत जाने के बाद भी न तो अब तक बीते पेराई सत्र का करीब 2 हजार करोड़ के बकाये का भुगतान कराया जा सका है, और न ही इस वर्ष भी गन्ना घटतौली और सरेआम गन्ना क्रय केन्द्रों को बेचे जाने जैसे भ्रष्टाचार पर ही लगाम लगाई जा सकी है. जिसका खामियाजा यूपी के लाखों गन्ना किसानों को भुगतना पड़ रहा है.