फिर भी ज़िंदगी हसीन है…
 

दोस्तों कई बार आपने देखा होगा लोग फ़ोन पर बात करते-करते  इतने अधिक ग़ुस्से में आ जाते हैं कि उनके हाव-भाव से लेकर आवाज़ तक सब कुछ बदल जाता है। ऐसे लोग अक्सर विपरीत परिस्थितियों में खुद पर कंट्रोल ना रख पाने के कारण जीवन में अपना बड़ा नुक़सान कर लेते हैं। हाल ही में ऐसा ही एक नजारा मुझे सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक विडियो में देखने को मिला, जिसमें एक शिक्षक अपने विद्यालय के प्रधानाध्यापक को चिल्लाते हुए लातों से मार रहा था। प्रधानाध्यापक द्वारा लेट आने की वजह पूछना इस झगड़े की जड़ थी। प्रधानाध्यापक द्वारा इसकी शिकायत करते ही इन जनाब को अपनी गलती का एहसास हुआ और यह माफ़ी माँगने के लिए थाने पहुँच गए।

वैसे दोस्तों मुझे इस झगड़े की शुरुआत और मारपीट तक पहुँचने की पूरी घटना तो नहीं पता है पर मुझे लगता है कि अगर हम लोगों को दया और करुणा के साथ डील करें और विपरीत परिस्थितियों में भी अपना सेल्फ़ कंट्रोल ना खोएँ तो अपने जीवन को शांति के साथ रहते हुए गुज़ारा जा सकता है। इसे में आपको एक कहानी के माध्यम से समझाने का प्रयास करता हूँ।

बहुत साल पहले चीन के एक गाँव में शिकारी रहा करता था जिसके पास ढेर सारे क्रूर शिकारी कुत्ते थे, जो मौक़ा मिलते ही किसी को भी काट लिया करते थे। इस शिकारी के घर के पास वाले घर में एक किसान रहा करता था। किसान ने अपनी ज़रूरतों के हिसाब से बकरी के मेमनों को पाल रखा था। शिकारी के कुत्ते अक्सर मौक़ा मिलते ही दोनों के घर के बीच की बाढ़ को कूदकर इन मेमनों को नुक़सान पहुँचाया करते थे।

किसान हर बार अपने पड़ोसी को इस बारे में बोला करता था लेकिन वह उसे सुन कर भी अनसुना कर दिया करता था। एक कान से सुनकर बात को दूसरे कान से निकाल देनें की आदत की वजह से किसान बड़ा परेशान रहने लगा। अगली बार शिकारी के कुत्ते द्वारा किसान के मेमनों को नुक़सान पहुँचाने पर किसान को बहुत तेज ग़ुस्सा आ गया और उसने शिकारी पर क़ानूनी कार्यवाही करने के उद्देश्य से अपने न्यायाधीश दोस्त से सम्पर्क करा।

किसान की पूरी बात बड़ी धैर्य और शांति से सुनने के बाद न्यायाधीश बोला, ‘देखो मित्र तुम बोल तो एकदम सही रहे हो। अगर तुमने अपने पड़ोसी की शिकायत करी तो निश्चित तौर पर तुम उसे सजा दिलवाने में कामयाब हो जाओगे और उसके बाद निश्चित तौर पर तुम्हारा पड़ोसी अपने कुत्तों को क़ाबू में भी रखने लगेगा। पर तुम्हारे द्वारा इस तरह कार्यवाही करने का एक दुष्परिणाम होगा, तुम हमेशा के लिए एक मित्र, एक पड़ोसी खो दोगे और उसके स्थान पर तुम्हारे पड़ोस में तुम्हारा दुश्मन रहने लगेगा। शिकायत करने से पूर्व तुम खुद यह निर्णय लो की तुम किसके साथ, किसके पास रहना पसंद करोगे एक दोस्त के अथवा एक दुश्मन के।’

न्यायाधीश की बात सुन किसान दुविधा में पड़ गया और बिना शिकायत करे ही वापस अपने गाँव लौट आया। वह अब सोच रहा था की किस तरह शिकारी को समझाया जाए जिससे लाठी भी ना टूटे और साँप भी मर जाए। अचानक किसान को एक आइडिया सूझा उसने कुछ फल, मिठाई और मेमनों के 3-4 सुंदर बच्चों को लिया और अपने पड़ोसी शिकारी के घर मिलने के लिए पहुँच गया। वहाँ पहुँचने पर किसान ने अपने साथ लाए सबसे सुंदर मेमनों के बच्चों को शिकारी के दोनों बच्चों को उपहार स्वरूप दिया और मिठाई व फल शिकारी को देते हुए उसका कुशलक्षेम पूछने लगा।
 
कुछ देर बैठने और बातचीत करने के बाद किसान वापस अपने घर लौट आया। वहीं शिकारी के बच्चे मेमनों को उपहार में पा बड़े खुश थे और किसान के जाने के बाद भी उनके साथ खेलने में मस्त थे। जल्द ही बच्चों और मेमनों में अच्छी दोस्ती हो गई। अपने बेटों को इतना खुश और मस्त देख शिकारी को बहुत अच्छा लगा। शिकारी कुत्तों से मेमने के बच्चों को बचाने के लिए अब शिकारी ने अपने घर के बाड़े में एक अलग स्थान तय कर दिया।

इसके बाद शिकारी के कुत्तों ने कभी किसान के मेमनों को परेशान नहीं किया। एक दिन शिकारी को किसान की दयालुता और उदारता याद आयी। अपनी कृतज्ञता प्रकट करने के उद्देश्य से वह तुरंत अपनी पत्नी और बच्चों को लेकर उनके घर पहुँच गया और उस दिन के बाद से वे दोनों बहुत अच्छे दोस्त बन गए।

जी हाँ दोस्तों दया, करुणा के साथ आप लोगों के दिल जीत सकते हैं, दिलों की दूरियों को मिटा सकते हैं। इसीलिए कहा जाता है की दान, उपवास और प्रार्थना से बेहतर है अपने अंदर इंसानियत का भाव रखना, दूसरों के प्रति दया और करुणा का भाव रखना।

आइए दोस्तों आज से एक निर्णय लेते हैं, हम अपने परिवार, मित्रों और समाज के लोगों को अशिष्ट तरीके से नीचा दिखाकर डील करने के स्थान पर विनम्रता, दया और करुणा के साथ डील करेंगे। याद रखिएगा दया और करुणा विश्वास के लक्षण हैं।

-निर्मल भटनागर
एजुकेशनल कंसलटेंट एवं मोटिवेशनल स्पीकर
dreamsachieverspune@gmail.com