फिर भी ज़िंदगी हसीन है… 


जीवन को बेहतर बनाने के लिए ईश्वर हमें कई मौके देता है, लेकिन सही तरीक़ा ना पता होने की वजह से हम उन मौक़ों को पहचान नहीं पाते हैं और सब कुछ होते हुए भी परेशान रहते हैं। इसीलिए तो कहा गया है क़िस्मत सही समय पर मौक़ों को पहचानने की हमारी क्षमता है। क़िस्मत या भविष्य बनाने का ऐसा ही एक मौक़ा हम सभी को सामान रूप से स्कूली शिक्षा के दौरान मिलता है जब हम कक्षा दसवीं के बाद आगे पढ़ने के लिए विषय चुनते हैं। लेकिन अकसर सही मार्गदर्शन या ज्ञान के अभाव में हम यह मौक़ा गँवा देते हैं।

मुझे बहुत अच्छे से याद है दोस्तों, कक्षा दसवीं के बाद मैंने गणित विषय सिर्फ़ और सिर्फ़ दो कारणों से लिया था। पहला, मेरे सभी दोस्तों ने इस विषय को चुना था और दूसरा उस वक्त यह माना जाता था कि पढ़ने-लिखने में अच्छे लोग गणित विषय लेते हैं और मैं यह दिखाना चाहता था कि मैं पढ़ने में अच्छा हूँ।
वैसे ऐसा ही कुछ सभी छात्रों के साथ होता है, जो निर्णय उसके पूरे भविष्य को प्रभावित करता है वो निर्णय वह अपने माता-पिता की इच्छा पूरी करने के लिए अथवा अपने दोस्तों के साथ बने रहने के कारण ले लेता है। लेकिन अगर विषय चुनने के पूर्व कुछ सामान्य लेकिन महत्वपूर्ण बातों एवं कारकों पर ध्यान दिया जाए तो वह अपने जीवन को नया रूप दे सकता है।

कक्षा दसवीं के बाद, सही स्ट्रीम का चयन एक महत्वपूर्ण कदम होता है क्योंकि एक छात्र का पूरा भविष्य इस विशेष निर्णय से प्रभावित होता है। जैसा मैंने आपको पहले बताया आमतौर पर, छात्र अपने माता-पिता की पसंद का या अधिकांश दोस्तों की पसंद का एक कोर्स चुनते हैं क्योंकि छात्रों को कक्षा 10 के बाद स्ट्रीम का चुनाव करने की सही जानकारी और इसके महत्व के बारे में पता नहीं होता है। स्ट्रीम या सही विकल्प पर पहुंचने के लिए हमें निम्न पाँच महत्वपूर्ण कारकों पर ध्यान देने की आवश्यकता है- 

1) अपने अंतर्मन की सुनें 
दोस्तों खुद से ज़्यादा खुद को कोई और नहीं पहचान सकता है इसीलिए विषय चुनते वक्त अंतर्मन की सुनना एक अच्छा विचार है। विषय का चुनाव करने के लिए पसंद, योग्यता और क्षमता को आधार बनाएँ। अपनीं पसंद, नापसंद की लिस्ट बनाएँ, जो पसंद है उसमें भविष्य में क्या सम्भावनाएँ है उसे पहचानने का प्रयास करें। वैसे इसके लिए सर्वश्रेष्ठ तरीक़ा विस्तृत SWOT अनालिसिस करना है।

2) विषय (स्ट्रीम) को पहचाने और उस स्ट्रीम में उपलब्ध सम्भावनाओं का पता लगाएँ
उपलब्ध विषयों का पता लगाना और उन विषयों को लेकर आत्मनिरीक्षण करना एक महत्वपूर्ण कदम है। विषय में खुद की रुचि, सम्भावित कठिनाइयों, उच्च शिक्षा अथवा व्यवसायिक पाठ्यक्रम में उपलब्ध विकल्पों, भविष्य की सम्भावनाओं आदि को सूचीबद्ध करके उसमें कैरियर की सम्भावनाओं को पहचानें और भविष्य की योजना बनाकर सफलता सुनिश्चित करें।

3) काउंसलर अथवा विषय विशेषज्ञ की मदद लें
आप अपनी योग्यता, क्षमता व पसंद के आधार पर किसी विषय को चुन पाएँ अथवा ना चुन पाएँ, दोनों ही स्थिति में काउंसलर की मदद लेना एक अच्छा विचार है। यह विषय चुनने के दौरान होने वाली गलती की सम्भावना को लगभग ख़त्म कर देता है। वैसे बायोमेट्रिक अथवा साइकोमेट्रिक टेस्ट अथवा कैरियर मार्गदर्शन सेमिनार और शैक्षिक मेलों के द्वारा भी जानकारी लेकर निर्णय लेना एक अच्छा विचार है। इसमें विशेषज्ञ, छात्र की क्षमता का सटीक आकलन कर सही सुझाव दे सकते हैं जो आपको भविष्य में आने वाली परेशानियों से बचने में मदद करता है।

4) भेड़ चाल का हिस्सा ना बनें 
विज्ञापनों या अधिकतर दोस्तों द्वारा चुने गए विषय का चयन करना अकसर नुक़सानदायक होता है क्यूँकि इसका आपकी योग्यता, पसंद और क्षमता से कोई लेना देना नहीं होता है। इसका सीधा-सीधा असर कैरियर की सम्भावनाओं पर पढ़ता है। इसलिए विषय सम्बंधित निर्णय लेने से पहले, उन कारकों के बारे में समझदारी से सोचें जो आपको पाठ्यक्रम को पूरा करने के लिए प्रेरित करेंगे। अपनी रुचि, योग्यता और क्षमता से मेल खाने वाली स्ट्रीम को चुनना सुनिश्चित करें और भीड़ का अनुसरण करने से बचें।

5) अपने माता-पिता और शिक्षकों की मदद लें 
अपने माता-पिता और शिक्षकों के साथ विषय चयन को लेकर चर्चा करना हमेशा लाभदायक होता है। वे समुदाय के उन कुछ चुनिंदा विश्वसनीय अनुभवी लोगों में से होते हैं, जो हमारी आंतरिक शक्तियों, पसंद व हितों के आधार पर सही मार्गदर्शन दे सकते हैं। वैसे भी बच्चे के निर्णय को यह दोनों ही प्रभावित करते हैं। 

वैसे माता-पिता और शिक्षकों को भी एक बात याद रखना चाहिए कि वे अपना निर्णय बच्चों पर ना थोपें जैसा कि अकसर देखा जाता है क्यूंकि बच्चे कि पसंद को नज़रंदाज़ कर अपने निर्णय के आधार पर, बच्चे को विषय चुनने के लिए बाध्य करना उसके लिए उलझन बढ़ाकर भविष्य को अंधकारमय बनाता है। इसके स्थान पर उन्हें अपनी पसंद को आधार बनाकर विषय चुनने, उसमें कैरियर बनाने में मदद करें और उन्हें वास्तविक ख़ुशी के बारे में बताकर खुश रहना सिखाएँ। भविष्य निर्माण में विशेषज्ञ और अनुभवी का मार्गदर्शन हमेशा लाभदायक होता है और आपसे बेहतर बच्चे का भला सोचने वाला कोई और हो ही नहीं सकता है।

याद रखिएगा साथियों, भविष्य का निर्माण हमेशा आज लिए गए निर्णयों के आधार पर होता है। इसीलिए सही स्ट्रीम या विषय का चयन बच्चे के भविष्य निर्माण के लिए ज़रूरी होता है। इस निर्णय को लेते वक्त सभी मापदंडों पर विचार करें। सबसे महत्वपूर्ण विचार केवल एक ही है, ऐसे विषय या स्ट्रीम का चयन करना जो आपकी पसंद, योग्यता और क्षमता से मेल खाता हो। अच्छे कैरियर के निर्माण में सही विषय या स्ट्रीम चुनना हमेशा एक महत्वपूर्ण रोल निभाता है। याद रखिएगा दोस्तों, कोई भी विषय या स्ट्रीम अच्छी या बुरी नहीं होती और ठीक इसी प्रकार किसी भी विषय या स्ट्रीम में अधिक या कम सम्भावना नहीं होती, हर क्षेत्र में सफल कैरियर बनाने के लिए समान अवसर उपलब्ध होते हैं।

निर्मल भटनागर
एजुकेशनल कंसलटेंट एवं मोटिवेशनल स्पीकर 
dreamsachieverspune@gmail.com