फिर भी ज़िंदगी हसीन है…


दोस्तों कल हमने जीवन में सबसे ज़्यादा काम आने वाली स्किल, कम्यूनिकेशन स्किल के एक हिस्से ‘बातचीत कैसे जारी रखें’ के 9 सूत्रों में से पहले सूत्र को सीखा था। साथ ही स्वयं को यह भी याद दिलाया था कि बोल पाने का अर्थ कम्यूनिकेट करना नहीं होता है। बोलने से सामने वाले तक हमारे शब्द तो पहुँच जाते हैं लेकिन जब आप सही तरीक़े से कम्यूनिकेट करते हैं तब शब्दों के साथ उसका मर्म भी सामने वाले तक पहुँचता है। चलिए आगे बढ़ने से पहले कल के सीखे हुए प्रथम सूत्र को दोहरा लेते हैं-

पहला सूत्र - बातचीत शुरू करने के पहले पूरी तरह रिलैक्स रहें
बातचीत के दौरान अपना सर्वश्रेष्ठ देने की चाह में अकसर हम अपने ऊपर अवांछित तनाव बना लेते हैं और बातचीत की शुरुआत घबराहट के साथ करते हैं। घबराहट हमारे ध्यान को सामने वाले की बात से हटाकर आगे क्या कहना है इसपर लगा देती है और बातचीत का यह दौर थम-सा जाता है। इस स्थिति से बचने के लिए आप सामने वाले के पद, योग्यता, उपलब्धि, अनुभव या उम्र से बात करने के स्थान पर उस व्यक्ति से बातचीत करने का प्रयास करें और निम्न तीन चरणों में तैयारी करें- 

पहला चरण - जल्दबाज़ी से बचें 
अगर आप उपरोक्त वर्णित किसी व्यक्ति से बातचीत के लिए जा रहे हैं तो समय से थोड़ा पहले शुरुआत करें और आराम से धीमी गति से रिलैक्स रहते हुए सामने वाले व्यक्ति तक पहुँचे।

दूसरा चरण - गहरी साँस लें 
बातचीत शुरू करने के पहले किसी शांत स्थान को देखकर एक या दो मिनिट तक गहरी साँस लें और आती जाती साँसों पर अपना ध्यान लगाकर भविष्य के तनाव से बचकर वर्तमान में अर्थात् ‘इसी क्षण’ में लौट आएँ।

तीसरा चरण - सर्वप्रथम रिश्ता बनाने पर ध्यान दें 
बातचीत की शुरुआत धीमी गति से अभिवादन करते हुए करें। अभिवादन, आदर आधारित रिश्ते बनाने की शुरुआत करता है। शुरुआत में सामने वाले व्यक्ति को अधिक से अधिक बोलने का मौक़ा दें और ध्यान से उसकी बात सुनें। जब भी सामने वाला व्यक्ति रुके तब जी, थोड़ा गहराई से इस बताएँ, अच्छा, बहुत खूब आदि कहते हुए उन्हें और ज़्यादा बोलने के लिए मजबूर करें। 

जब आप बोलना शुरू करें, तो सामने वाले के हित को ध्यान में रखते हुए एक मित्र की भाँति शुरू करें। ऐसा करना आपको रिलैक्स रहते हुए अपनी बात कहने में मदद करेगा। दोस्तों पहले दो चरण आपके आत्मविश्वास को बढ़ाते हुए, आरामदायक स्थिति में रहते हुए माहौल को आपके अनुरूप सकारात्मक बनाने में मदद करेंगे। वहीं तीसरा चरण एक अच्छा रिश्ता बनाते हुए धीरे-धीरे बातचीत को आपके पक्ष में मोड़ने में मदद करेगा।

दूसरा सूत्र - बातचीत में कभी खत्म ना होने वाले विषयों का समावेश करें 
पहले तीनों चरणों की मदद से जब आप रिलैक्स रहते हुए बातचीत का आधार आपसी रिश्ते तक ले आए, तब बातचीत में कभी खत्म ना होने वाले विषयों का समावेश करें। इसके लिए आप FORD नियम को याद रख सकते हैं अर्थात् सामने वाले व्यक्ति के परिवार (फ़ैमिली), पेशा (ऑक्युपेशन), शौक़ या मनोरंजन (रिक्रीएशन) एवं सपनों (ड्रीम्स) पर बात करें।

यह आपको बातचीत को उस विषय पर ले जाने का मौक़ा देगा जिस पर बात करना सामने वाले को पसंद है और ऐसा करना आपको मज़बूत रिश्ता बनाने, अपनी बातचीत को अच्छे से समझाने या थोड़ा लम्बा चलाने का मौक़ा देगा।

तीसरा सूत्र - सामने वाले के हित का सम्मान करें और उसमें सही मायने में रुचि लें 
आम तौर पर लोग इस बात का दिखावा करते हैं कि वे आपके कार्य या आपके लक्ष्य को पूरा कराने में रुचि ले रहे हैं जबकि उनका मक़सद सिर्फ़ अपना हित साधना होता है। ऐसा करते समय व्यक्ति को लगता ज़रूर है कि वह जल्द ही अपने लक्ष्यों को पा लेगा, पर ऐसा होता नहीं है। इसके विपरीत अगर आप FORD सूत्र को प्रयोग में लाकर दोस्ती कर लेते हैं तो आपके लिए बातचीत जारी रखना आसान हो जाता है। वैसे भी दोस्तों डेल कार्नेगी का कहना है कि, ‘आप दो माह में दो वर्षों से ज़्यादा दोस्त बना सकते हैं बस आपको उनमें सही मायनों में रुचि लेना शुरू करना होगा।’ इसे दूसरे शब्दों में कहा जा सकता है नए दोस्त बनाने का सर्वश्रेष्ठ तरीक़ा है कि आप उनके दोस्त बन जाए।

बातचीत के दौरान ओपन एंडेड प्रश्न (अर्थात् जिन प्रश्नों के उत्तर सीधे ‘हाँ’ या ‘ना’ में ना दिया जा सके, उदाहरण के लिए इस विषय के बारे में आपके विचार क्या है बजाए इसके कि यह आपको पसंद है क्या?) पूछना भी एक अच्छा तरीक़ा रहता है। ओपन एंडेड प्रश्नों के जवाब भी बातचीत को आगे बढ़ाने में मदद करते हैं।

चौथा सूत्र - अपने पसंद के विषय पर बात करें 
आमतौर पर जब आप अपने पसंदीदा विषय या जुनून पर चर्चा करते हैं तब आपकी ऊर्जा अपने आप बढ़ जाती है। बढ़ी हुई ऊर्जा या उत्साह से बात करना सकारात्मक माहौल बनाता है या पॉज़िटिव वाइब्ज़ पैदा करता है। यह स्थिति सामने वाले को आपसे जुड़े रहने के लिए प्रेरित करती है और कई बार सामने वाला व्यक्ति भी अपने जुनून पर चर्चा शुरू कर देता है। ऐसी स्थिति में कई बार आप अपने सम्बंध सामने वाले से मज़बूत बना पाते हैं और आपसी बातचीत का सिलसिला अनवरत चलता रहता हैं।

आज के लिए दोस्तों इतना ही, कल हम बातचीत जारी रखने के अगले 3 सूत्र सीखेंगे।

-निर्मल भटनागर
एजुकेशनल कंसलटेंट एवं मोटिवेशनल स्पीकर 
dreamsachieverspune@gmail.com