वास्तु शास्त्र नें पेड पौधों को काफी महत्व पूर्ण बताया है। इसके अनुसार पौधे पौधे हमारे जीवन में बहुत सकारात्मक प्रभाव छोड़ते हैं। मगर इसे जानना बेहद ज़रूरी होता है कि कौन सा पौधा घर में लगाना लाभदायक होता है। क्योंकि कई पौधे घर आदि में रखने से कई हालातों में अशुभ प्रभाव भी पड़ता है। इसलिए वास्तु विशेषज्ञ हिदायत देते हैं कि हर व्यक्ति को घर में कोई भी पौधा रखने से पहले वास्तु शास्त्र में दी गई बातों को जान लेना चाहिए। इसी कड़ी में आज हम आपको बताने वाले हैं वास्तु में बताए गए मयूर के पौधे से जुड़ लाभ। जी हां, वास्तु शास्त्र की मानें इस मयूर शिखा नामक पौधे को घर में रखने से जातक को विभिन्न प्रकार के लाभ मिल सकते हैं।
वास्तु विशेषज्ञ बताते हैं कि यह पौधा आसानी से प्राप्त हो जाता है। चूंकि ये मोर की शिखा जैसा दिखाई देता है, इसलिए इसे मयूर शिखा के नाम से जाना जाता है। बंगाल में इसे लाल मोरग व मोरगफूल कहा जाता है, तो वहीं तेलगु में इसे माइरक्षिपा और ओड़िया में मयूर चूड़िआ कहते हैं। कहने का भाव है कि भारतीय भाषाओं में इसे कई प्रकार के नाम से जाना जाता है। इसके वैज्ञानिक नाम की बात करें तो इसे एक्टीनप्टेरीडेसी कहा जाता है, तो वहीं अंग्रेजी भाषा में इसे पीकॉक्स टेल कहते हैं। देखने में यह मुर्गे की कलगी की तरह दिखाई देता है, जिस कारण इसे ‘मुर्गे का फूल’ भी कहा जाता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार यह पौधा 2 से 3 प्रकार का होता है।

वास्तु दृष्टि से ही नहीं बल्कि बाग-बगीचों और घर के अंदर की सुंदरता में चार चांद लगाने के लिए भी इस पौधे को लगाया जाता है, इसलिए इसे डेकोरेटिव पौधा भी कहा जाता है। जिस घर में अधिकतरों को कोई बीमारी ने पकड़ रखा हो या सदस्य मानसिक तनाव से ग्रस्ति हो, उन्हें अपने जीवन की इस नकारात्मकता को दूर करने के लिए इस पौधे को घर में रखना चाहिए।तो वहीं इस पौधे को घर में लगाने से जातक के ऊपर से पितृदोष भी मिट जाता है। वास्तु शास्त्रियों के अनुसार इस घर में रखने से बुरी आत्माओं और नकारात्मक शक्तियां का भी नाश होता है, जिस कारण इसे दुष्टात्मानाशक पौधा भी कहा जाता है। आयुर्वेद में इससे जुड़े वर्णन के मुताबिक इसका इस्तेमाल औषधि के रूप में किया जाता है। तो वहीं इसकी पत्तियों और फूलों का सब्जी के रूप में भी प्रयोग किया जाता है।