अंतरिक्ष में बेकाबू होकर भटक रहे एस्टेरॉयड यानी क्षुद्रग्रह धरती के लिए बड़ा खतरा होते हैं। अंतरिक्ष के जानकार लगातार इन पर नजर रखते हैं। ऐसे ही दो एस्टेरॉयड हाल के दिनों में धरती के बेहद करीब से गुजरे हैं। बीती 14 सितंबर को दो एस्टेरॉयड सफलतापूर्वक धरती को छोड़ते हुए निकल गए। नासा के मुताबिक, पहली स्पेस रॉक बस के आकार का क्षुद्रग्रह थी, जिसे 2020 RF3 नाम दिया गया। यह हमारे ग्रह 58,500 मील (94,000 किलोमीटर) की दूरी पर 2:49 बजे गुजर गया।

इसके कुछ घंटों बाद एक छोटा यानी कार के आकार का क्षुद्रग्रह 2020 RD4 65,700 मील (लगभग 106,000 किमी) की दूरी से धरती से गुजरा। यह घटना 4:33 बजे की है। इटली के वर्चुअल टेलीस्कोप प्रोजेक्ट के जरिए क्षुद्रग्रह 2020 RD4 की लाइवस्ट्रीम की गई, जिसे दुनियाभर के लोगों ने देखा।

नासा के मुताबिक, क्षुद्रग्रह वर्ष में कई बार पृथ्वी के करीब आते हैं, क्योंकि हमारे सौर मंडल में ऐसे हजारों क्षुद्रग्रह हैं। नासा और अन्य देशों के विभिन्न संस्थान इन खतरनाक अंतरिक्ष चट्टानों पर कड़ी नजर रखता है। अच्छी बात यह है कि पृथ्वी को आने वाले समय में भी ऐसे किसी एस्टरॉयड से खतरा नहीं है।

पृथ्वी के इतिहास में ऐसा कई बार हुआ है जब क्षुद्रग्रहों के टकराने से यहां भारी तबाही हुई। हाल ही की घटना में 2013 में रूस के चेल्याबिंस्क में विशालकाय एस्टरॉयड को टूटते देखा गया था, जिससे एक छह मंजिला इमारत को नुकसान हुआ और कुछ लोगों को चोटें आईं। कहा जाता है कि 66 मिलियन वर्ष पहले डायनासोर के विलुप्त होने के पीछे भी ऐसा ही एक विशालकाय क्षुद्रग्रह था।

इसके बाद ही खगोलविदों ने शुरुआती सौर प्रणाली के गठन के बारे में अधिक जानने के लिए क्षुद्रग्रहों का अध्ययन किया। क्षुद्रग्रहों और ऐसी वस्तुओं को धूमकेतु के रूप में जाना जाता है जो विभिन्न ग्रहों से निकले टुकड़ों से बने हैं। ये अंतरिक्ष में तेज गति से घुमते रहते हैं।