भोपाल । राजधानी में  बड़ा बाग कब्रिस्तान में लगे इमली के पेड़ की जडें सड चुकी थी, इसी‎लिए वह हवा का दबाव नहीं झेल पर और ‎सडक पर ‎गिर गया। हादसे के वक्त अगर  ट्रैफिक सिग्नल बंद न होते तो  नुकसान बढ सकता था। करीब दो सौ साल पुराना बताया जा रहा है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, शाम करीब साढ़े चार बजे आंधी चलने के साथ बौछारें पड़ने लगी थीं, तभी बिजली गुल होने से भोपाल टॉकीज चौराहा पर लगे ट्रैफिक सिग्नल भी बंद हो गए। इस वजह से वाहन चालक बिना रोक-टोक के गुजरते रहे। ठीक इसी समय इमली का पेड़ मौत बनकर कब्रिस्तान की बाउंड्री से लगी दुकानों पर मौत बनकर आ गिरा। यदि ट्रैफिक सिग्नल चालू रहते तो सैफिया कॉलेज रोड से बैरसिया रोड की तरफ जाने वाले कई वाहन चालक हरी बत्ती का इंतजार करने के लिए वहां खड़े रहते, जहां पेड़ गिरा। इससे हादसे का मंजर और भयावह हो सकता था। बता दें कि पेड़ गिरने की वजह से आसपास की कई दुकानें क्षतिग्रस्‍त हो गईं। इस हादसे में पेड़ के नीचे दबकर दो लोगों की मौत हो गई, जबकि दो घायल हो गए। भोपाल टॉकीज चौराहे पर दिनभर खासी चहलपहल रहती है। बड़ा बाग कब्रिस्तान की दीवार से लगी कई कच्ची दुकानें बनी हुई हैं। पेड़ दीवार से सटकर बनीं नेशनल होटल, बुरहानपुर जलेबी, केजीएन कबाब और एक पंक्चर सुधारने की दुकानों को चपेट में लेकर गिरा। पेड़ गिरते ही सैफिया कॉलेज रोड बंद हो गया। क्षेत्र में अफरा-तफरी मच गई। बचाव कार्य के लिए लोगों ने फोन लगाए, लेकिन नगर निगम की रेस्क्यू टीम करीब आधा घंटे की देरी से पहुंची। स्थानीय रहवासी रूपेश ने बताया कि जब तक बचाव दल पहुंचा, तब तक वहां मौजूद लोगों ने सब्बल, जैक, हथोड़े की मदद से दो घायलों को बाहर निकाल लिया और अस्पताल पहुंचाया। रेस्क्यू टीम के साथ पहुंचे फारुख ने बताया कि बचाव टीम के साथ चार जेसीबी, दो हाइड्रा क्रेन मिलकर भी पेड़ को उठा नहीं पा रही थीं। इस वजह से कई कटर मशीनों का इस्तेमाल कर पेड़ की डालियों को काटकर अलग किया गया। शाम करीब पांच बजे से शुरू हुआ रेस्क्यू का काम रात आठ बजे तक जारी रहा। फारुख ने बताया कि डालियां काटने के बाद जेसीबी से मुख्य तने को हटाने का काम शुरू किया गया। तब देखा कि पेड़ की जड़ें सड़ चुकी थीं। संभवत: इस वजह से पेड़ गिरा। पेड़ गिरने के बाद बिजली के तार टूटने के कारण सैफिया कॉलेज रोड, काजी कैंप, शाहजहांनाबाद, जुमेराती, आजाद मार्केट, लक्ष्मी टॉकीज, आदि क्षेत्र कई घंटे तक अंधेरे में डूबे रहे। बताया जा रहा है ‎कि शाम के समय पुराने शहर में करीब 50 से 60 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से चली हवाओं ने भारी तबाही मचाई। इस दौरान कई पेड़ गिर गए।