नई दिल्ली ,इस वित्त वर्ष में आप कौन-सा टैक्स सिस्टम चुनते हैं इसकी जानकारी देंइसकी जानकारी अभी आपको अपने नियोक्ता को देनी होगीअगर आपने जानकारी नहीं दी तो पुराने सिस्टम से टीडीएस कटता रहेगासीबीडीटी ने एक सर्कुलर जारी कर इसके बारे में साफ बताया है

इस वित्त वर्ष में इनवेस्टमेंट की घोषणा के बारे में बहुत से लोगों के पास उनकी कंपनी के एचआर से मेल आने लगे हैं. अभी तक लोग इस दुविधा में भी हैं कि बजट में मिले नए टैक्स सेविंग विकल्प को चुनें या पुराने को ही रहने दें. अब केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) ने यह साफ किया है कि इसकी जानकारी आपको अपनी कंपनी को अभी देनी होगी. नहीं तो आपकी कंपनी पुराने सिस्टम के मुताबिक ही टीडीएस काटती रहेगी.

सीबीडीटी ने सोमवार को कहा कि जो नौकरीपेशा लोग नए टैक्स सिस्टम से टैक्स देना चाहते हैं उन्हें इसके लिए पहले अपने एम्प्लॉयर को जानकारी देनी होगी ताकि सैलरी देते समय टीडीएस कटौती उसके मुताबिक की जा सके.

इसलिए आपको तत्काल अपने एचआर को इस बात की जानकारी देनी चाहिए कि आप नए टैक्स सिस्टम को अपनाना चाहते हैं या पुराने सिस्टम को.
 
गौरतलब है कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 2020—21 के बजट में नए टैक्स सिस्टम का ऐलान किया था. इसके तहत कम रेट पर नए टैक्स स्लैब बनाए गए हैं. हालांकि ऐसा करने पर हाउस रेंट अलाउंस (एचआरए), होम लोन ब्याज, 80C, 80D और 80CCD के तहत निवेश पर छूट नहीं मिलेगा.


क्या है नया सिस्टम
बजट में घोषित नए टैक्स 2.5 लाख लाख रुपये तक की सालाना आमदनी टैक्स से मुक्त है. 2.5 लाख से 5 लाख रुपये तक आमदनी पर 5 फीसदी की दर से टैक्स लगेगा, 5 लाख से 7.5 लाख तक आमदनी पर 10 फीसदी, 7.5 लाख से 10 लाख की आमदनी पर 15 फीसदी की दर से टैक्स देना होगा. 10 से 12.5 लाख की आमदनी पर 20 फीसदी टैक्स लगेगा. 12.5 लाख से 15 लाख की आमदनी पर 25 फीसदी और 15 से से अधिक सालाना आय पर 30 फीसदी टैक्स का प्रावधान है.


पुराने सिस्टम से कितना टैक्स?
पुराने सिस्टम के तहत 2.5 लाख रुपये तक सालाना व्यक्तिगत आमदनी टैक्स मुक्त है. 2.5 लाख से 5 लाख तक की आमदनी पर 5 फीसदी टैक्स लगता है, हालांकि इस पर भी सरकार रिबेट देती है तो आपकी 5 लाख रुपये तक की आय पूरी तरह से टैक्स फ्री हो जाती है. 5 लाख से 10 लाख की आमदनी पर 20 फीसदी टैक्स लगता है और 10 लाख से अधिक आमदनी पर 30 फीसदी की दर से टैक्स देना होता है. पुराने सिस्टम में आपको एचआरए, निवेश सहित सहित कई तरह की छूट का विकल्प भी मिलता है.

बाद में भी हो सकता है बदलाव
न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेज (CBDT) ने सोमवार को जारी अपने सर्कुलर में कहा कि जो कर्मचारी बजट में घोषित कम दर वाले टैक्स सिस्टम को चुनना चाहते हैं उन्हें अपने नियोक्ता को इसकी जानकारी देनी होगी. नियोक्ता सालाना आमदनी की गणना करके इनकम टैक्स कानून की धारा 115 के प्रावधानों के तहत टीडीएस (टैक्स डिडक्टेड ऐट सोर्स) काटेंगे. यदि कर्मचारी नए सिस्टम को चुनने की इच्छा नहीं जाहिर करते हैं तो नियोक्ता पुराने हिसाब से ही टैक्स काटेंगे.

हालांकि, सीबीडीटी ने यह भी कहा है कि कर्मचारी टैक्स सिस्टम का विकल्प इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल करते समय भी बदल सकते हैं. उस समय अगर आपने बदलाव किया तो टीडीएस की राशि उस मुताबिक समायोजित कर ली जाएगी.