फिर भी ज़िंदगी हसीन है…


दोस्तों निश्चित तौर पर मेरे सामान ही आप भी इस बात से सहमत होंगे कि खेल और खिलाड़ी की दुनिया अलग ही चलती है। खेल हमें जीवन के कई महत्वपूर्ण सबक़ ‘खेल-खेल’ में ही सिखा जाता है। जी हाँ दोस्तों, खेल ही एकमात्र ऐसी जगह है जहां जीतने वाला हारने वाले को भी गले लगाकर सांत्वना देता है, अगले मैच के लिए शुभकामनाएँ देता है। वहीं हारने वाला भी उस हार को भूल कर अगले मैच की तैयारी में लग जाता है क्यूँकि उसे पता है, हर नया मैच ‘शून्य’ से ही शुरू होता है और दूसरी बात ‘हार’ हमें ‘जीतना’ सिखाती है अर्थात् कई बार हारने के बाद भी आप विजेता बन सकते है। 

अगर इन पाठों को जीवन से जोड़ कर देखा जाए तो हम समझ सकते हैं कि हर नया दिन, नई सम्भावनाएँ लेकर आता है। पूर्व में कितनी भी दिक्कतें या परेशानियों हों, उसके बाद भी आप अपने जीवन को नई ऊँचाइयों तक ले जा सकते हैं। ठीक इसी तरह दोस्तों टोक्यो ओलंपिक के सातवें दिन हुई पुरुषों की 3000 मीटर स्टीपलचेज दौड़ भी हमें जीवन का एक बहुत महत्वपूर्ण पाठ सिखा गई है। आईए आगे बढ़ने से पहले एक बार उस दौड़ और उसके परिणाम पर चर्चा कर लेते हैं।

ओलंपिक में हुई इस दौड़ में इंडियन आर्मी में कार्यरत, एथलीट अविनाश साबले ने भी भाग लिया था। अविनाश ने इस दौड़ में अपना सर्वश्रेष्ठ देते हुए इसे 8:18.12 के समय के साथ पूरा किया। 8:18.12 में दौड़ पूरा करना उनका अभी तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन था और इसके साथ उन्होंने राष्ट्रीय रिकॉर्ड भी बनाया। अविनाश साबले ने पुरुषों की इस 3000 मीटर स्टीपलचेज़ हीट दौड़ के दूसरे दौर में जबरदस्त प्रयास किया और अपने हीट में सातवें नम्बर पर आए एवं हीट्स के तीन दौर समाप्त होने तक सर्वश्रेष्ठ समय के आधार पर 13वें स्थान पर थे। दोस्तों इस दौड़ के फ़ाइनल के लिए 16 धावकों को चुना जाना था और अविनाश 13वें स्थान पर थे। इसके बाद भी दौड़ के एक नियम ‘हर हीट के टॉप थ्री धावकों को फाइनल का टिकट मिलेगा और उसके बाद छह सर्वश्रेष्ठ उम्मीदवार फ़ाइनल में जाएँगे।’ की वजह से वे फ़ाइनल के लिए क्वालिफ़ाई नहीं कर पाए। 

पुरुषों की 3000 मीटर स्टीपलचेज़ की हीट 3 बेहद धीमी थी और यहां तक ​​कि हीट 3 के विजेता से भी अविनाश साबले का प्रदर्शन काफी बेहतर था पर उपरोक्त नियम का फ़ायदा इस हीट के प्रथम तीन विजेताओं को मिला और दौड़ पूरी करने में लगने वाले समय के आधार 13वें स्थान पर रहने के बाद भी अविनाश अंतिम 16 में स्थान नहीं बना पाए। अविनाश आज 3000 मीटर स्टीपलचेज़ दौड़ के फ़ाइनल में क्वालिफ़ाई ना कर पाने वाले सबसे तेज़ धावक हैं।

कई बार दोस्तों जीवन में भी ऐसा हो जाता है, अपनी ओर से सब कुछ ठीक होने के बाद भी परिणाम हमारे पक्ष में नहीं होते। और आशातीत परिणाम ना मिल पाना नकारात्मक भाव के साथ, हमारे व्यवहार में चिड़चिड़ापन और तनाव पैदा कर देता है। इसके विपरीत अगर अविनाश साबले की प्रतिक्रिया को देखा जाए तो उन्होंने दौड़ में आए परिणाम का विरोध नहीं करा, उसके लिए रोए नहीं, किसी को दोष नहीं दिया बल्कि उन्होंने उसे पूर्ण गरिमा के साथ स्वीकारा। उन्हें पता था कि उन्होंने अपना सर्वश्रेष्ठ दिया है और अपने अंदर छिपी क्षमता को पहचाना है। ठीक इसी तरह दोस्तों, असफलता को सकारात्मक रूप से स्वीकार कर हम अपने जीवन को नया आयाम, नया रूप दे सकते हैं।

दोस्तों आज का लेख अविनाश साबले को शुभकामनाएँ दिए बिना अधूरा ही रह जाएगा। टोक्यो ओलंपिक 2021 में ट्रैक पर उनका प्रदर्शन प्रेरणादायक और शानदार था। आज पूरे देश को अविनाश और उनके इस प्रयास पर गर्व है। ग्लोबल हेराल्ड परिवार की ओर से श्री अविनाश साबले को उनके सुनहरे भविष्य के लिए ढेर सारी शुभकामनाएँ।

-निर्मल भटनागर
एजुकेशनल कंसलटेंट एवं मोटिवेशनल स्पीकर 
dreamsachieverspune@gmail.com