जयपुर| अशोक गहलोत और सचिन पायलट की तकरार के बाद भले ही राजस्थान कांग्रेस में गुटबाजी की खबरें आम हो गई हो। लेकिन प्रदेश में बीजेपी भी आपस में ही बंटी हुई है और कई गुट अस्तिस्व में है। गुटबाजी बड़े नेताओं के बीच सबसे ज्यादा है। एक ओर जहां पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे का गुट है तो वहीं दूसरी ओर केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत और प्रदेश अध्यक्ष सतीश पुनिया का भी अलग-अलग गुट है। अर्जुन राम मेघवाल तथा ओम प्रकाश माथुर का भी एक अलग गुट नजर आता है। इन गुटों के समर्थक अलग-अलग सोशल मीडिया मंचों पर अपने अपने नेताओं को आने वाले चुनाव के लिए मुख्यमंत्री पद का दावेदार बताते हैं। यही कारण है कि भाजपा की गुटबाजी की खबरें अब आम होती चली जा रही है। खास बात है कि गजेंद्र सिंह शेखावत और सतीश पूनिया के गुट में संघ के कई समर्थक भी शामिल है। 
  कहा जा रहा है कि सबसे ज्यादा मजबूत गुट पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे का है। वसुंधरा राजे को लगभग 3 दर्जन से ज्यादा विधायकों का समर्थन हासिल है और यही कारण है कि जब अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच विवाद की स्थिति थी तब भाजपा कोई लाभ नहीं उठा सके थी। वसुंधरा राजे की गुट ने तो अलग समर्थक मंच भी बना लिया है। हालांकि प्रदेश अध्यक्ष लगातार यह कह रहे हैं कि अब तक पार्टी का सक्रिय नेता इस तरीके के गुटों में आगे नहीं आया है। वही गहलोत लगातार विपक्ष पर गुटबाजी को लेकर निशाना साध रहे हैं। हाल ही में कांग्रेस के एक मंत्री ने यह कह दिया कि राजस्थान में भाजपा वसुंधरा राजे के बिना कुछ भी नहीं है। गुटबाजी की खबरों के बीच आलाकमान कई बार राज्य के नेतृत्व से मुलाकात कर चुका है लेकिन अब तक किसी नतीजे पर नहीं पहुंचा है। उम्मीद है कि आने वाले दिनों में राजस्थान की गुटबाजी की खबरें आलाकमान क़ी कार्यवाही के बाद कम हो जाएं।