जयपुर. लॉकडाउन (Lockdown) के कारण श्रमिकों के सामने पैदा हुए रोजगार के संकट के बीच राजस्थान में मनरेगा (MNREGA) 'संजीवनी' साबित हो रही है. राजस्थान देश का पहला राज्य है जो संकट की इस घड़ी में ग्रामीण इलाकों में इतने बड़े पैमाने पर मजदूरों को काम मुहैया करवा रहा है. इसका अंदाजा आप इस बात से लगाया जा सकता है कि अप्रैल माह के पहले पखवाड़े के अंत में राजस्थान में जहां मनरेगा श्रमिकों की संख्या केवल 60 हजार थी. लेकिन महज करीब 36 दिनों के भीतर 21 मई तक ये संख्या बढ़कर साढ़े 36 लाख के आंकड़े को भी पार कर गई.

दरअसल कोरोना को लेकर जब देशभर में लॉकडाउन हुआ तो शहरों से लेकर ग्रामीण इलाकों तक में रोजगार का संकट सामने आना शुरू हो गया. इसी बीच राजस्थान के उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि मॉडिफाई लॉकडाउन में कोरोना को लेकर जारी एडवाइजरी का पालन करते हुए ग्रामीण इलाकों में श्रमिकों को मनरेगा योजना के तहत काम दिया जाए और वो भी व्यक्तिगत लाभ की श्रेणी में.

श्रमिकों की संख्या में तेजी से वृद्धि हुई
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग का दायित्व भी संभाल रहे पायलट का कहना था कि इससे ग्रामीण इलाकों में श्रमिकों को आर्थिक सम्बल मिलेगा. पायलट ने जब इसके निर्देश दिए थे उस समय राजस्थान में महज 60 हजार मनरेगा श्रमिक ही थे. लेकिन उसके बाद तेजी से श्रमिकों की संख्या में वृद्धि होती गई.

60 हजार से 36 लाख 54 हजार का सफर


-अप्रैल के पहले पखवाड़े के अंत में श्रमिकों की संख्या करीब 60 हजार थी.
- अप्रैल के दूसरे पखवाड़े में 26 अप्रैल को ये संख्या करीब 9 लाख 60 हजार पहुंच गई.
- 1 मई 2020 को ये संख्या 13 लाख 4 हजार 128 पर आई.
- 10 मई को श्रमिकों की संख्या ने 24 लाख 31 हजार के आंकड़े को छू लिया.
- 20 मई को मनरेगा श्रमिकों की संख्या 35 लाख 59 हजार पहुंची.
- 21 मई को ये संख्या 36 लाख 54 हजार 130 तक पहुंच गई.

डेढ़ लाख से ज्यादा कार्य जारी

वर्तमान में मनरेगा में जहां करीब 36 लाख 54 हजार श्रमिक कार्य कर रहे हैं, वहीं मनरेगा के तहत स्वीकृत किये गए कार्यों में से 1 लाख 52 हजार 558 कार्य जारी हैं. प्रत्येक कार्य पर औसतन करीब 24 श्रमिक कार्य कर रहे हैं. कोरोना महामारी को देखते हुए कार्यस्थल पर सोशल डिस्टेंसिंग और श्रमिकों के बार- बार हाथ धोने जैसी बातों का भी ध्यान रखा जा रहा है.

मजबूती से जुटी है टीम
उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट नियमित रूप से इसकी मॉनिटरिंग भी कर रहे हैं. वहीं मनरेगा आयुक्त पीसी किशन भी जिला स्तर पर मनरेगा की नियमित मॉनिटरिंग कर रहे हैं. वे नियमित रूप से जिलों से डेटा हासिल करते हैं. जो जिले श्रमिक नियोजन में सबसे नीचे हैं, वहां के अधिकारियों से वार्ता कर उन्हें आवश्यक दिशा निर्देश भी देते हैं.