नई दिल्ली । एक राज्य से दूसरे राज्य में नक्सलियों का आवागमन रोकने के लिए छत्तीसगढ़ सहित चार राज्यों की पुलिस मिलकर अभियान तेज करेगी। इसके अलावा चार अन्य राज्यों से भी नक्सल, तस्करी सहित अन्य मुद्दों पर समन्वय बढ़ाया जाएगा। चार राज्यों ने नक्सलियों के खिलाफ साझा रणनीति को अमल में लाने के लिए पिछले दिनों उच्चस्तरीय बैठक की है। बताया गया है कि इस अभियान में जरूरत के मुताबिक, अन्य राज्य भी शामिल होंगे। सुरक्षा बल से जुड़े एक अधिकारी ने कहा कि छतीसगढ़, महाराष्ट्र, तेलंगाना और ओडिशा में पुलिस व सुरक्षा बल समन्वित रणनीति के साथ नक्सलियों के सफाए का अभियान चलाएंगे। ये राज्य नक्सल से जुड़ी हर सूचना भी आपस में साझा करेंगे। अधिकारियों के मुताबिक, चारों राज्य हर महीने डीजीपी स्तर की बैठक में अभियान की समीक्षा करेंगे। सूत्रों ने कहा कि छतीसगढ़ के धुर नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा बलों के नक्सलरोधी ऑपरेशन के बाद कई नक्सली भागकर नए इलाको में गए हैं। नक्सलियों की नया बेल्ट तैयार करने की कोशिश भी सुरक्षा बलों की जानकारी में है। सुरक्षा बलों का मानना है कि इस समय नक्सली काफी कमजोर स्थिति में हैं। उनके इलाके लगातार सिमट रहे हैं। हमलों की उनकी मंशा भी ज्यादा कामयाब नही हो रही है। ऐसे में नक्सल नेतृत्व नए इलाको में पैठ बनाने का प्रयास कर रहा है। सूत्रों ने कहा राज्यो के बीच सहयोग लगातार बढ़ा है। समय और जरूरत के मुताबिक राज्य आपस मे रणनीति तय करके साझा अभियान चलाने पर राजी हैं। गौरतलब है कि नक्सलियों के ट्राईजंक्शन को ध्यान में रखकर राज्यों की समन्वित रणनीति का सिलसिला 2009 में ही शुरू हो गया था। उस वक्त तीन समूह में ट्राई-जंक्शन के अंतर्गत आंध्र प्रदेश- महाराष्ट्र- छत्तीसगढ़, ओडिशा-झारखंड-छत्तीसगढ़ और पश्चिम बंगाल-झारखंड-ओडिशा शामिल किए गए थे। वर्ष 2018 में नक्सलियों के नए इलाको पर सुरक्षा बलों का ध्यान गया। पता चला कि मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र के बॉर्डर के खतरनाक जंगलों में नक्सली ट्रेनिंग कैंप चलाकर नक्सलियों को गुरिल्ला वॉर की ट्रेनिंग दे रहे हैं। नक्सलियों की लगातार बदलती रणनीति के मुताबिक सुरक्षा बल भी अपनी रणनीति नए सिरे से तय करते हैं।