फिर भी ज़िंदगी हसीन है…


दोस्तों साक्षात्कार (इंटरव्यू) में कई बार हम कुछ ऐसा बोल जाते हैं जिसकी वजह से योग्यता, शिक्षा, हुनर आदि सब कुछ होने के बाद भी हमें सफलता नहीं मिल पाती है, इसलिए सिर्फ़ उतना ही बोलें जो नितांत आवश्यक हो और साक्षात्कारकर्ता का प्रश्न पूछने का उद्देश्य पूरा करता हो। अभी तक हमने साक्षात्कार के दौरान ना बोलने वाली दस बातों में से प्रथम छः बातों को समझा था। आईए आगे बढ़ने से पहले उन छः बातों को दोहरा लेते हैं- 

पहली बात - ‘वैसे तो मैं इस तरह की नौकरी’ या ‘इस क्षेत्र में काम नहीं करना चाहता था…’
कैरियर में भविष्य को लेकर पूछे गए किसी भी प्रश्न के जवाब में उपरोक्त बात कहना आपकी छवि ऐसे अवसरवादी व्यक्ति के रूप में बनाती है जो सिर्फ़ अपने फ़ायदे के लिए निर्णय लेता है। इसलिए ऐसा कभी ना कहें बल्कि इसके स्थान पर सीमित शब्दों में कम्पनी के लाभ के अनुसार सटीक जवाब दें।

दूसरी बात - झूठ बोलने से बचें 
साक्षात्कारकर्ता से झूठ बोलना एवं पृष्ठभूमि सत्यापन अथवा सोशल मीडिया पोस्ट के द्वारा झूठ का पकड़ाना आपकी विश्वसनीयता घटाता है, इसलिए झूठ बोलने से बचें। इसके स्थान पर अपनी बात इस तरह बोलें जिससे साक्षात्कारकर्ता आपकी बात के सकारात्मक पक्ष को समझ सके।

तीसरी बात - ‘इस वक्त मैं अलग-अलग प्रोफ़ाईल के लिए साक्षात्कार दे रहा हूँ।’ या ‘मैंने इन कम्पनियों में अभी इंटरव्यू दिया है।’, कहने से बचें 
अपने लिए सर्वश्रेष्ठ चुनना हमारा अधिकार है लेकिन भूलिए मत यह अधिकार साक्षात्कारकर्ता के पास भी है। इसलिए उपरोक्त बात कह कर साक्षात्कारकर्ता को उलझन में ना डालें। इसके स्थान पर जिस पद के लिए आवेदन किया है उसके लिए अपनी योग्यता साबित करें और उन्हें एहसास कराए कि आपसे बेहतर उम्मीदवार खोजना उनके लिए आसान नहीं होगा। 

चौथी बात - ‘मैं जल्द पदोन्नति की आशा रखता हूँ।’ या ‘मैं जल्दी सफल होना चाहता हूँ।’ 
अपनी महत्वाकांक्षा बताना साक्षात्कारकर्ता के मन में असुरक्षा की भावना पैदा करता है, उसे लगता है कि आप उसके साथ लम्बे समय तक कार्य नहीं करेंगे। इसके स्थान पर आप कह सकते हैं, ‘मुझे ऐसा लगता है कि यह नौकरी मुझे अपना सर्वश्रेष्ठ देने और विकास करने का मौक़ा देगी।’

पाँचवीं बात - ‘मेरे लिए संदर्भ देना मुश्किल रहेगा।’ या ‘मेरे पास कोई संदर्भ नहीं है।’
साक्षात्कारकर्ता आप जो कह रहे हैं ,उससे ज़्यादा लोग आपके बारे में क्या कह रहे हैं को ज़्यादा सही मानता है। ऐसे में संदर्भ ना दे पाना उसके मन में संशय पैदा करता है। इसलिए साक्षात्कार के पहले उन दो-तीन लोगों के नाम सोच कर रखें जिन पर आपको पूर्ण विश्वास हो कि वे आपके बारे में सही बता पाएँगे। वैसे इसके लिए आप अपने कुछ प्रोफ़ेसर के नाम देने के साथ इंटर्न अथवा पूर्व नौकरी से प्राप्त अनुशंसा अथवा अन्य प्रमाण पत्र भी लगा सकते हैं।

छठी बात - कभी ना कहें कि ‘पिछली नौकरी का अनुभव अच्छा नहीं था।’ या ‘पूर्व वाली कम्पनी ठीक नहीं थी।'
पूर्व नियोक्ता के बारे में उपरोक्त बात कहना आपकी नकारात्मक छवि बनाता है। इसके स्थान पर आप कह सकते हैं कि, ‘मेरी पिछली नौकरी अच्छी थी। मैं उत्साहित था, मैंने वह सब किया जो मैं कर सकता था। लेकिन मेरा पिछला जॉब प्रोफ़ाईल सीमित था। इसलिए मैं अभी नई नौकरी खोज रहा हूँ, जिसमें मुझे निम्न कार्य करने का मौक़ा मिले। इसके बाद आपने जिस पद के लिए आवेदन दिया है उसके बारे में बताएँ।

आइए दोस्तों अबअगली दो मुख्य बातों को सीखने का प्रयास करते हैं-

सातवीं बात - आगे की शिक्षा से सम्बंधित निकट भविष्य की योजना पर बात ना करें ।
आमतौर पर साक्षात्कारकर्ता ऐसे लोग चुनना चाहते हैं जो कंपनी में कम से कम एक वर्ष तक रुकें। जिससे वे आप पर किए जाने वाले निवेश पर स्वस्थ प्रतिफल प्राप्त कर सकें। ऐसे में निकट भविष्य की पूर्णकालिक शिक्षा से सम्बंधित जानकारी देना उन्हें उलझन में डाल सकता है। अगर आपको लगता है कि आप नौकरी और अध्ययन दोनों साथ-साथ अच्छे से कर सकते हैं, तब भी इसके बारे में कुछ ना कहें। इसके स्थान पर सिर्फ़ इतना कहें, ‘मैं हमेशा नई बातें/हुनर सीखने के लिए तैयार रहता हूँ। अगर आप मुझे चुनते हैं तो मैं अपना सर्वश्रेष्ठ देने के साथ-साथ आवश्यकतानुसार सीखने के लिए भी हमेशा तैयार रहूँगा।' लेकिन अगर आपको किसी भी कारण से इसे साझा करना ही है तो कहें, ‘मैं अपने काम और अपने अध्ययन के बीच एक स्पष्ट अंतर बनाए रखने में सक्षम हूँ और मेरी पढ़ाई किसी भी कीमत पर आपके काम में बाधा नहीं डालेगी।’

आठवीं बात - कभी ना बताएँ कि आपको कोई लेने आने वाला है इसलिए आप इंतज़ार कर रहे हैं।
उपरोक्त बात कहना अनजाने में साक्षात्कारकर्ता को सोचने के लिए मजबूर करता है कि आपको अपना निर्णय लेने लेने के लिए किसी की आवश्यकता पड़ती है। यह आपकी गलत तस्वीर बनाता है क्यूँकि साक्षात्कारकर्ता आत्मनिर्भर लोगों को चुनना पसंद करते हैं जो अपने निर्णय खुद ले सकें, नई शुरुआत कर सकें और अपनी ज़िम्मेदारी खुद उठा सकें। 

अगर आप रूढ़िवादी और संरक्षित परिवार से हैं एवं आपके लिए ऐसा करना ज़रूरी है तो अपने माता-पिता या पति को साक्षात्कार के स्थान से थोड़ा दूर बुलाएँ और इंटरव्यू खत्म होने के बाद रिसेप्शनिस्ट को धन्यवाद कहते हुए उस स्थान तक चले जाएँ जहां आपको लेने के लिए कोई आया हुआ है। आज के लिए इतना ही दोस्तों कल हम अंतिम दो सूत्र सीखेंगे।

-निर्मल भटनागर
एजुकेशनल कंसलटेंट एवं मोटिवेशनल स्पीकर 
dreamsachieverspune@gmail.com