भोपाल।राज्य सरकार ने मसाजिद कमेटी भोपाल, सीहोर एवं रायसेन के नये नियम जारी कर इन्हें प्रभावशील कर दिया है। नये नियमों के अनुसार, अब काजी मुस्लिमजनों के वैवाहिक मामलों में तलाक का फैसला नहीं ले पायेंगे और सिर्फ इसकी सलाह दे सकेंगे। इसी प्रकार अब मुफ्ती भी हरकुछ फतवा जारी नहीं कर सकेंगे बल्कि मुस्लिम पर्सनल लॉ के हिसाब से विवादों का निपटारा कर सकेंगे।


यह है मसाजिद कमेटी :
उल्लेखनीय है कि आजादी के पहले भोपाल, रायसेन एवं सीहोर तत्कालीन भोपाल रियासत में आते थे और उसके द्वारा इन तीनों जिलों में मस्जिदों का रखरखाव किया जाता था और मुस्लिमजनों के विवाद निपटाये जाते थे। आजादी के बाद ये मसाजिद कमेटी सरकारी अनुदान से चलने लगीं जो अब तक संचालित हैं। वर्तमान में इस कमेटी के अध्यक्ष अब्दुल हफीज, सचिव एडव्होकेट एसएम सलमान तथा तीन सदस्य मुस्तफा सिद्दीकी, अब्दुल समद एवं आरिफ अजीज हैं जिनकी नियुक्ति कमलनाथ सरकार ने गत 8 मार्च 2019 को की हुई है। इनका कार्यकाल दो साल का है। मसाजिद कमेटी को सरकार की ओर से सालाना करीब साढ़े तीन करोड़ रुपये अनुदान मिलता है। इस कमेटी के अंतर्गत तीनों जिलों में करीब साढ़े तीन सौ मस्जिदें आती हैं।


नये नियमों में ये किये नये प्रावधान :
पहले मसाजिद कमेटी वर्ष 1960 में प्रचलित व्यवहार नियमों से संचालित होती थी जिसमें वर्तमान के हिसाब से कमेटी को संचालित करने में अनेक दिक्कतें थीं। इसलिये नये नियमों में अनेक नवीन प्रावधान कर दिये गये हैं :
एक, कमेटी में नियुक्ति अब राजपत्र में प्रकाशित की जायेगी तथा जब तक नई नियुक्तियां राजपत्र में प्रकाशित नहीं होती तब तक वर्तमान कमेटी के लोग कार्यरत रहेंगे।
दो, कमेटी के कर्मियों की सेवानिवृत्ति आयु 62 वर्ष होगी और उन्हें विभिन्न प्रकार के अवकाश मिल सकेंगे।
तीन, कमेटी को हर माह बैठक करना होगी।
चार, कमेटी हर साल अपने अंकेक्षित लेखा सरकार को भेजेगी।
पांच, शहर काजी मुस्लिम पर्सनल लॉ के हिसाब से वैवाहिक विवाद, तलाक और सेपरेशन निपटाने हेतु सिर्फ सलह देंगे जिसमें किसी वकील को जिरह करने की इजाजत नहीं होगी। इसी प्रकार शहर मुफ्ती मुस्लिम पर्सनल लॉ के हिसाब से ही फतवा जारी कर सकेंगे।
छह, कमेटी के कर्मचारी सामाजिक एवं शैक्षणिक कार्यों में भाग ले सकेंगे।
सात, कमेटी के सचिव को 25 हजार रुपये तक आकस्मिक व्यय करने की शक्ति होगी।
विभागीय अधिकारी ने बताया कि मसाजिद कमेटी के सरकार द्वारा नये नियम बनाये गये हैं जोकि वर्तमान के समय से व्यवहारिक हैं। पहले के नियम आज के समय के हिसाब से उपयुक्त नहीं थे।
डॉ. नवीन जोशी