भोपाल।  कांग्रेस की कमलनाथ सरकार ने अपने 15 महीनों के कार्यकाल में चुनाव के समय जारी किए गए अपने वचन पत्र का एक भी वादा पूरा नहीं किया। अब 28 विधानसभाओं के चुनाव देखते हुए कमलनाथ एक और पूरक वचनपत्र ले आए हैं, ताकि एक बार फिर से जनता की आंखों में धूल झोंकी जा सके। लेकिन प्रदेश की जनता संवेदनशील है और उसने कमलनाथ सरकार की 15 महीनों की कारगुजारियों को देखा है। इसलिए वह किसी भी तरह कांग्रेस और कमलनाथ के झांसे में आने वाली नहीं है। यह बात भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष व सांसद विष्णुदत्त शर्मा ने शनिवार को प्रदेश कार्यालय में पत्रकार वार्ता के दौरान कांग्रेस के पूरक वचन पत्र पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कही।

कांग्रेस की हालत बताता है पूरक वचन पत्र
श्री शर्मा ने कहा कि कांग्रेस का यह वचन पत्र पार्टी की अंदरूनी हालत को प्रकट करता है। इसमें कोई घोषणा नहीं है। कमलनाथ के अलावा कोई दूसरा नेता इस वचन पत्र में कही नजर नहीं आता और न ही किसी का जिक्र है। श्री शर्मा ने कहा कि नया वचन पत्र जारी करते समय कमलनाथ जी ने 4 मिनट में 5 बार भारतीय जनता पार्टी और मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान को कोसा। इससे पता चलता है कि कांग्रेस और कमलनाथ हमारे मुख्यमंत्री श्री चौहान और भारतीय जनता पार्टी से किस कदर भयभीत हैं। उन्होंने कहा कि कमलनाथ जी के पास अगर नए वचनपत्र में जनता को देने के लिए कोई वादा नहीं था, तो कम से कम पुराने वचनपत्र के वादे पूरे न करने के लिए जनता से माफी ही मांग लेते। श्री शर्मा ने कहा कि वचनपत्र देखकर लगता है कि अब राहुल गांधी भी कमलनाथ से हाथ खींचने लगे हैं, क्योंकि 10 दिन में कर्जमाफी का वादा उन्होंने ही किया था, जो कभी पूरा नहीं हुआ।

कांग्रेस की कर्जमाफी सफेद झूठ
श्री शर्मा ने कहा कि 2018 में जारी किए गए कांग्रेस के 75 बिंदुओं वाले वचनपत्र की सबसे अहम बात किसानों की कर्जमाफी थी। लेकिन कांग्रेस का कर्जमाफी का दावा सफेद झूठ है। जिस 6000 करोड़ की कर्जमाफी की बात कमलनाथ करते हैं, वास्तव में कांग्रेस की सरकार ने उस 6000 करोड़ से बैंकों का एनपीए चुकाया है, कर्जमाफी नहीं की। श्री शर्मा ने कहा कि कांग्रेस की सरकार ने बड़ी संख्या में कर्जमाफी के फर्जी प्रमाण पत्र जारी किए हैं। श्री शर्मा ने महू के तीन किसानों को कमलनाथ सरकार द्वारा जारी किए गए ऐसे ही प्रमाण पत्रों को प्रस्तुत किया, जिनमें किसानों ने खुद अपने कर्ज चुकाए और सरकार ने उन्हें कर्जमाफी की सूची में शामिल कर प्रमाण पत्र दे दिया। श्री शर्मा ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ एक पेन ड्राइव में जिन किसानों की सूची लेकर घूम रहे हैं, उसमें अधिकांश नाम ऐसे ही हैं। उन्होंने कहा कि आज प्रदेश का किसान कमलनाथ से ये पूछ रहा है कि उनके साथ ऐसा कपट, ये गद्दारी कांग्रेस की सरकार ने क्यों की?

अधूरा रहा कांग्रेस का हर वादा
श्री शर्मा ने कहा कि कांग्रेस ने अपने 2018 के वचन पत्र में कहा था कि हम अनाज, सब्जियों पर किसानों को बोनस देंगे, दूध पर बोनस देंगे, लेकिन किसी किसान को एक रुपया बोनस नहीं दिया। कांग्रेस ने डीजल-पेट्रोल पर छूट देने की बात कही थी। लोगों को आवास के अधिकार की बात कही थी, जिसमें ढाई लाख रुपये और 450 वर्गफीट जगह का प्रावधान था। कांग्रेस ने कहा था हम नौजवानों को 4 हजार रुपये महीना बेरोजगारी भत्ता देंगे, व्यवसाय के लिए रियायती दरों पर कर्ज देंगे। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने रोजगार प्रोत्साहन के लिए 10 हजार रुपये का अनुदानयुक्त ऋण देने की बात कही थी, लेकिन कमलनाथ सरकार ने अन्य वादों की तरह इस वादे को भी पूरा नहीं किया। दूसरी तरफ हमारी शिवराज सरकार ने सिर्फ 6 महीनों के कार्यकाल में लाखों स्ट्रीट वेंडर्स को 10 हजार रुपये तक का ब्याजमुक्त कर्ज उपलब्ध करा दिया है।

शुक्र है, वचन पत्र में कोरोना की बात तो की
श्री शर्मा ने कहा कि शुक्र है कांग्रेस ने अपने पूरक वचन पत्र में कोरोना की बात तो की, वर्ना कमलनाथ सरकार ने तो अपने कार्यकाल में इस संकट पर एक शब्द नहीं कहा और न ही कुछ किया। उन्होंने कहा कि इस संकट को कांग्रेस पार्टी और कमलनाथ सरकार ने कितनी गंभीरता से लिया, यह कमलनाथ के उस ऑडियो से पता चलता है, जिसमें वे मीडिया से कह रहे हैं कि पहले राजनीतिक वायरस से तो निपट लें, कोरोना फिर देखेंगे। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री रहते कमलनाथ आइफा अवार्ड की तैयारियों में लगे रहे, लेकिन कोरोना संकट से निपटने पर कोई ध्यान नहीं दिया। इंदौर में तब्लीगी जमात के लोग जमा होते रहे, लेकिन कमलनाथ सरकार सलमान खान और जैक्लीन के स्वागत में लगी रही। श्री शर्मा ने कहा कि फरवरी माह में वल्लभभवन में अधिकारियों की एक बैठक रखी गई थी, लेकिन उस बैठक में भी कोरोना संकट पर चर्चा तक नहीं हुई और पूरे समय आइफा की ही बात चलती रही। उन्होंने कहा कि भाजपा की सरकार आने के बाद मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने कोरोना संकट से मुकाबले के लिए व्यवस्थाएं कीं और भाजपा कार्यकर्ताओं ने अपनी जान संकट में डालते हुए पीड़ितों की मदद की।

कमलनाथ सरकार ने सिर्फ छीना, दिया कुछ नही
प्रदेश अध्यक्ष श्री शर्मा ने कहा कि सलमान खान और जैक्लीन के साथ फोटो खिंचाने में व्यस्त रहे कमलनाथ ने आइफा अवार्ड के लिए 700 करोड़ का प्रावधान किया, लेकिन मैचिंग ग्रांट न होने की बात कहकर ढाई लाख गरीबों के लिए स्वीकृत आवास लौटा दिये। कमलनाथ अब पूछते हैं कि मेरा क्या कसूर है, उन्होंने एक नहीं हजारों कसूर किए हैं। उन्होंने संबल योजना बंद कर दी, बच्चों के लेपटॉप, विकलांगों की पेंशन बंद कर दी। श्री शर्मा ने कहा कि उनके कार्यकाल में मुख्यमंत्री कन्यादान योजना में 22500 शादियां हुईं, लेकिन किसी को 51000 की राशि नहीं मिली। उन्होंने कहा कि यह प्रदेश के लोगों के साथ धोखेबाजी नहीं, बल्कि एक अपराध है। कमलनाथ,आपने जनता की गरीबी का अपमान किया है।

दरबारी होने का रिवार्ड मिला था कमलनाथ को
श्री शर्मा ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी जल्दी ही हर विधानसभा के लिए अलग-अलग संकल्प पत्र जारी करने जा रही है, लेकिन मैं कमलनाथ से पूछना चाहता हूं कि हर विधानसभा के लिए उनका वचन पत्र कहां है? श्री शर्मा ने कहा कि कमलनाथ ऐसा कर भी नहीं सकते, क्योंकि वे कभी जमीन पर उतरे ही नहीं। उन्हें यह भ्रम हो गया था कि मैं मध्यप्रदेश का जननेता हूं, मुझे जनता ने चुना है, लेकिन वास्तविकता यह नहीं है। वास्तव में उन्हें जनता ने नहीं चुना, बल्कि उन्हें एक परिवार का दरबारी होने का रिवार्ड मिला था। श्री शर्मा ने कहा कि 15 महीनों के कार्यकाल में प्रदेश की जनता ने कमलनाथ का नेतृत्व, उनकी क्षमता और उनका काम बहुत अच्छे से देखा है और अब वह झांसे में आने वाली नहीं है।

साक्ष्य हैं, तो चुनाव आयोग को दे कांग्रेस और दिग्विजय सिंह
श्री शर्मा ने कहा कि दिग्विजय सिंह जो आरोप लगा रहे हैं, वे बिना सिर पैर के हैं। उन्होंने कहा कि दिग्विजय सिंह 10 साल प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे, लेकिन उनके कारनामों का जवाब जनता ने उन्हें दे दिया है। जनता में उनकी विश्वसनीयता नहीं है, यह बात स्वयं दिग्विजय सिंह भी जानते हैं। वे कहते हैं कि मेरे चुनाव प्रचार में जाने से वोट कटता है। श्री शर्मा ने कहा कि जिस नेता के प्रति जनता में इतनी चिढ़ हो, उस पर कौन विश्वास करेगा। उन्होंने कहा कि दिग्विजय और कांग्रेस के पास अगर भारतीय जनता पार्टी या उसके उम्मीदवारों के बारे में कोई भी साक्ष्य हैं, तो उन्हें चुनाव आयोग के पास जाना चाहिए।