अलवर|दो लोगों की हत्या के मामले में उम्र कैद की सजा काट रहे सुभाष को अच्छे व्यवहार के कारण खुली जेल में रहने की छूट मिली है। सुभाष अब समाज की मुख्य धारा से जुड़ने लगा है। रोजाना बिजली घर चौराहे पर गरीबों को अपने हाथों से खाना खिलाता है। यही नहीं वह लोगों को यह अहसास भी कराता है कि आदमी की एक गलती उसकी जिंदगी को कैद कर देती है। गलती से किए अपराध की सजा जिंदगी भर काटनी पड़ सकती है। सुभाष को अपनी गलती का अहसास है। अब वह गरीबों को खाना खिला कर खुशियां बांटने का प्रयास कर रहा है।

अलवर के बानसूर के शाहपुर गांव के निवासी सुभाष का कहना है कि करीब 10 साल पहले पाली में ढाबे पर खाना खाते समय झगड़ा हो गया था। इस झगड़े में हरियाणा के दो लोगों की मौत हो गई थी। उनकी हत्या के मामले में वह 10 साल की सजा काट चुका है। जेल में रहते उसके अच्छे बर्ताव को देखते हुए प्रशासन ने खुली जेल में रहने की छूट दी है। मतलब दिन में अलवर शहर में रह सकते हैं। कुछ काम भी कर सकते हैं, लेकिन रात को वापस जेल में जाना पड़ता है।

दो महीने से खाना खिला रहा
सुभाष पिछले दो माह से अलवर शहर के बिजली घर चौराहे पर गरीबों को खाना खिलाने वाली संस्था के कामकाज में हाटा बंटाता है। रोजाना शाम के समय यहां आने वाले गरीबों को खुद के हाथों से खाना देता है। यहां आने के बाद उसे अच्छा लगने लगा। सुभाष कहता है कि जिंदगी में बड़ा बदलाव आया है। जेल से बाहर आने के बाद यहां गरीबों को खाना खिलाने में सुखद अनुभव हुआ है। इस संस्था को चला रहे हिमांशु शर्मा का खूब सहयोग मिला है।

रोजाना 200 लोगों के खाने का इंतजाम
बिजली घर चौराहे पर एनजीओ की ओर से 200 लोगों का खाने का इंतजाम होता है। 10 रुपए लेकर भरपेट खाना देते हैं। बहुत से असहाय ऐसे भी आते हैं, जिनके पास 10 रुपए भी नहीं होते हैं। उनको निशुल्क भी खाना देते हैं। बहुत से लोगों के सहयोग से रोजाना खाने का इंतजाम होता है।