फिर भी ज़िंदगी हसीन है…


एक गधा जंगले में एक पेड के नीचे आराम कर रहा था। आराम करते करते अचानक उसके मन में ख़याल आया कि अगर धरती फट गई, तो मेरा और इस जंगल का क्या होगा? यह विचार आते ही उसके मन में ढेरों बुरे ख़यालात आने लगे। तभी अचानक ज़ोरदार धमाके की आवाज़ आई। आवाज़ सुनते ही गधा बुरी तरह डर गया, उसे लगा धरती सही में फट गई है। वह पागलों की तरह चिल्लाते हुए भागने लगा, ‘भागो-भागो धरती फट रही है…’ गधा भागते-भागते चिल्लाते जा रहा था। 

गधे को चिल्लाते हुए भागते देख, एक अन्य गधे ने पूछा, ‘भाई, ऐसे बदहवास से क्यों भागे जा रहे हो?’ पहले गधा बोला, ‘अभी बताने का समय नहीं है, जान बचानी है तो भागो, धरती फट रही है।’ अब दूसरा गधा भी अपने परिवार सहित उसके साथ भाग रहा था और सभी चिल्लाते जा रहे थे, ‘जान बचानी है तो भागो, धरती फट रही है।’ देखते ही देखते ढेर सारे गधे चिल्लाते हुए एक के पीछे एक भागने लगे।

गधों को इस तरह भागता देख कुछ दूसरे जानवर भी डर गए और उनके साथ अन्य जानवरों को सचेत करते हुए भागने लगे। कुछ ही देर में पूरे जंगल को पता चल गया था कि धरती फट रही है। अब चिल्लाना चीख-पुकार में बदलता जा रहा था और दौड़ने वाले जानवरों में साँप, बिच्छू, मेंढक, सियार, लोमड़ी, हाथी, घोड़े आदि शामिल हो गए थे। इतने सारे जानवरों को भागता देख जंगल का मंत्री भालू भी उनके साथ हो लिया।

हो-हल्ला जंगल के राजा शेर के कानों में पहुँचा। वे तुरंत गुफ़ा से बाहर आए और सभी जानवरों को एक सा राग अलापते हुए, एक ही दिशा में भागता देख हैरान रह गए। उन्होंने तुरंत दो-चार लम्बी छलांग लगाई और सभी जानवरों के सामने आ गए और ज़ोर से दहाड़कर बोले, “ये क्या पागलपन लगा रखा है, ‘धरती फट गई, धरती फट गई।’ कहाँ भागे जा रहे हो तुम सब?” झुंड में से भालू निकलकर सामने आया और बोला, ‘महाराज, धरती फट रही है, आप भी अपनी जान बचाइए और हमारे साथ चलिए।’ शेर चिढ़ते हुए बोला, ‘यह क्या बकवास कर रहे हो? किसने बोला तुमसे कि धरती फट रही है?’ भालू ने हाथ जोड़ते हुए चीते की तरफ़ ईशारा कर दिया। जब चीते से पूछा तो उसने बंदर की ओर, फिर बंदर ने चिढ़िया और चिढ़िया ने हाथी और इस तरह पूछते-पूछते अंत में गधे का नाम सामने आया। 

राजा शेर के बुलावे पर गधा घबराते हुए उनके सामने पहुँचा। उसे देखते ही राजा ने फिर से वही प्रश्न दोहरा दिया, ‘तुम्हें किसने कहा कि धरती फट रही है?’ गधा बोला, ‘महाराज मैंने खुद अपने कानों से सुना था कि धरती फट रही है।’ महाराज ने ग़ुस्से से उसकी ओर देखते हुए कहा, ‘तुमने अपने कानों से सुना है?’ गधा डरते हुए बोला, ‘जी महाराज।’ ‘चलो दिखाओ।’ शेर ने गधे से कहा।  मरता क्या ना करता, गधा डरते-डरते वापस उल्टी दिशा में चल दिया, उसके पीछे शेर और शेर के पीछे-पीछे सारे जानवर।

काफ़ी देर चलते रहने के बाद सब लोग उस जगह पहूँचे जहां गधे ने धरती फटने की आवाज़ सुनी थी। गधे ने ईशारा करते हुए कहा, ‘महाराज मैं यहाँ आराम कर रहा था तब मुझे ज़ोर से धरती फटने की आवाज़ आई और इस तरफ़ से धूल उठती हुई नज़र आई। शेर ने उस जगह का मुआयना करना शुरू किया। थोड़ी ही देर में शेर को सारा माजरा समझ आ गया। उसने जानवरों की ओर देखते हुए कहा, ‘यह गधा तो महामूर्ख है इसने इस नारियल को ऊँचे पेड़ से ज़मीन पर गिरने की आवाज़ और उस वजह से उड़ती धूल को, धरती फटने के अपने सपने से जोड़ लिया।’

जी हाँ दोस्तों, हर साल परीक्षा का समय पास आते-आते यह कहानी मुझे याद आ ही जाती है और पिछले साल तो मैंने खुद बिना दिमाग़ लगाए पूरे जंगल को एक दिशा में भागते देखने का साक्षात अनुभव करा था, लेकिन आज मै आपको यह कहानी दूसरे परिपेक्ष्य में बताता हूँ। एप्रिल 1 से शुरू हुए 45+ के COVID वैक्सिनेशन ड्राइव के लिए मैं हॉस्पिटल गया । हॉस्पिटल  द्वारा सभी की सुरक्षा को मद्देनज़र रख बहुत अच्छी व्यवस्था की गयी थी। सबसे पहले एंट्री पर थर्मल टेम्प्रचर चेक किया गया। जिन्हें भी बुख़ार था, उनके लिए सीधे हाथ पर अलग कमरे में व्यवस्था की गए थी, बाक़ी सभी को उल्टे हाथ पर सोशल डिसटेंसिंग के साथ बेठाया गया। इसके पश्चात हॉस्पिटल के कर्मचारी ने एक-एक करके सभी से बात करी और उसके पश्चात जिन्हें भी वैक्सीन लगवाना था, उन्हें एक रेजिस्ट्रेशन फ़ोर्म दिया गया। फ़ोर्म सीरीयल नम्बर के हिसाब से कलेक्ट किये गये। कुछ देर तो यह व्यवस्था ठीक चलती रही, लेकिन तभी वेटिंग एरिया में बेठे एक सज्जन हॉस्पिटल के रिसेप्शन पर जाकर अपने नम्बर में हो रही देरी के लिए बार-बार पूछने लगे। उनके ऐसा करने के कुछ देर बाद ही अन्य लोगों ने भी रिसेप्शन पर भीड़ लगाना शुरू कर दी। हॉस्पिटल द्वारा हमारी सुरक्षा के लिए की गए व्यवस्था कुछ ही देर में ध्व्स्थ हो गयी। मैं सोच रहा था, उन सभी लोगों के लिए 5 मिनट जल्दी वैक्सिनेशन होना ज़रूरी था या जीवन?

ठीक इसी तरह की भेड़चाल दोस्तों, हर साल बच्चों के द्वारा 10वी के बाद सब्जेक्ट चयन करते समय और 12वी के बाद कोर्स और कॉलेज चुनते समय देखी जाती है। लेकिन अगर आप अपने या अपने परिवार के सभी सदस्यों को 100% जीना सिखाना चाहते है तो उन्हें उनके चुनाव करने के तरीक़े को बदलना सिखाए।

-निर्मल भटनागर
एजुकेशनल कंसलटेंट एवं मोटिवेशनल स्पीकर 
dreamsachieverspune@gmail.com