कोलकाता । बंगाल में अम्फान तूफान ने सबसे ज्यादा पान की खेती को नुकसान पहुंचाया है। यह वह पान है, जिसकी देश में ही नहीं विदेशों में भी काफी मांग है। मीठा पत्ता नाम से मशहूर इस पान का स्वाद इस बार शायद ही अनुभव करने को मिले। साइक्लोन अम्फान ने पश्चिम बंगाल में हजारों हेक्टेयर भूमि पर होने वाली पान की खेती को पूरी तरह तहस नहस कर दिया है। कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार में पान की खेती को पटरी पर लाने में एक साल से अधिक समय लग जाएगा। लिहाजा देश सहित विदेशों में पान के शौकीनों को अगले करीब डेढ़ साल तक बंगाल के मीठे पान से वंचित रहना पड़ेगा। 
5,000 करोड़ रुपए का नुकसान 
बंगाल में पान की खेती को करीब 5,000 करोड़ रुपए के प्राथमिक नुकसान का अनुमान है। राज्य में लाखों की संख्या में पान उत्पादक किसानों के समक्ष रोजी-रोटी का संकट पैदा हो गया है। देश में 1.5 मिलियन किसान पान की खेती से जुड़े हैं। इनमें बंगाल के करीब 5 लाख किसान शामिल हैं। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी राज्य में पान की खेती को दुरुस्त करने के लिए 200 करोड़ रुपए आवंटित कर चुकी हैं।
बंगाल के मीठे पान की मांग ज्यादा
दुनिया में 90 प्रकार के पान पाए जाते हैं। इसमें से 45 किस्म के पान भारत में मौजूद हैं। इनमें से अकेले 30 किस्म के पान पश्चिम बंगाल में पाए जाते हैं। कृषि वैज्ञानिक काजल सेनगुप्त कहते हैं यहां बांग्ला, बांग्ला मीठा पत्ताा, काली बांग्ला, सांची और सिमुरली बांग्ला प्रजाति के पान की खेती बहुतायात में होती है।