लखनऊ । उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले में शुक्रवार को चारपाई पर मरीज को अस्पताल ले जाने की फोटो वायरल होने के बाद कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने योगी सरकार पर हमला बोला है। उन्होंने इस घटना को उत्तर प्रदेश सरकार की सिस्टम की हकीकत बताया है। उन्होंने आरोप लगाया कि कागजों पर ही सारी तैयारी हुई है। 
प्रियंका गांधी ने एक फेसबुक पोस्ट में लिखा, ‘‘कागजों पर उप्र में कोरोना की तीसरी लहर से लड़ने की तैयारी हो चुकी है। धड़ाधड़ मीटिंगों का दौर जारी है कि चुनाव कैसे लड़े जाएं, मंत्री पदों की रेवड़ियां कैसे बांटी। दिल्ली, मुंबई, बंगलौर सब जगह झूठे प्रचार की होर्डिंग लग चुकी है कि ‘यूपी में सब चंगा सी’ लेकिन, मिर्जापुर से आई ये तस्वीर उप्र सरकार के सिस्टम की हकीकत बयां करती है। मिर्जापुर के श्री सत्तू मुसहर जी दर्द से कराह रहे थे। उन्हें तमाम प्रयासों के बावजूद एंबुलेंस नहीं मिली। उनके परिजन इस तरह से इस कड़ी धूप में 8 किमी चलकर उन्हें अस्पताल लेकर गए। डर ये है कि इस सच्चाई को बाहर लाने वालों पर कहीं यूपी सरकार एनएसए न लगा दे।’’
विदित हो कि मिर्जापुर जिले के तिलांव गांव में शुक्रवार को कुछ लोग चारपाई पर मरीज को मरणासन्न हालत में स्वास्थ्य केंद्र ले जा रहे थे। स्वास्थ्य केंद्र आठ किलोमीटर दूर था और मरीज की हालत बिगड़ती जा रही थी। इसलिए स्थिति की गंभीरता को देखते हुए उन लोगों ने लालगंज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के स्थान पर झोलाछाप के यहां ही मरीज को दिखाया। उन्हें एंबुलेंस सुविधा के बारे में भी पता नहीं था और किसी के पास फोन भी नहीं था। ग्रामीण या पड़ोसी कोई भी उनकी मदद को आगे नहीं आया। क्षेत्र के तिलांव नंबर एक गांव के निवासी बीमार सत्तू (42) को अस्पताल तक पहुंचाने के लिए एंबुलेंस की सुविधा नहीं मिली तो परिजन चारपाई पर ही घर से आठ किलोमीटर दूरी स्थित अस्पताल ले जाने लगे। इस परिवार के सामने आई मुसीबत का न तो गांव के ग्राम प्रधान ने संज्ञान लिया और न ही प्रशासन ने। पेट दर्द से कराह रहे सत्तू को परिजन आठ किलोमीटर की दूरी पर लालगंज अस्पताल तक जाने के लिए डोली खटोली से लेकर चल दिए। रास्ते में जितने भी राहगीर मिले, सभी लोग सहानुभूति जताते रहे पर किसी ने मदद नहीं की। परिजन आठ किलोमीटर दूर स्थित स्वास्थ्य केंद्र जा रहे थे पर मरीज की हालत बिगड़ने पर वे आसपास कोई आसरा तलाशने लगे। इसके बाद एक झोलाछाप के यहां इलाज कराने पहुंचे। पूछने पर परिजनों ने बताया कि मोबाइल फोन नहीं है और किसी ने एंबुलेंस के लिए फोन नहीं किया। हम लोगों को पता नहीं था कि एंबुलेंस मुफ्त में सेवा देती है।