जयपुर । एक साल पूर्व कोरोना संक्रमण की पहली लहर ने देश में लाखों जाने अल्पसमय में ही लील ली थी और उन जानों का मोक्षधाम में अंतिम संस्कार भी कर दिया गया था मगर कफ्र्यू और लॉकडाउन के बीच ऐसी कई अस्थियां आज भी जयपुर के आदर्श नगर, चांदपोल मोक्षधाम में विजर्सन का इंतजार कर रही है ऐसे कई अस्थि कलश मोक्षधाम में रखे है जिनके परिजन आज तक उन्हें लेने नही पहुंचे है। 
जयपुर के आदर्श नगर मोक्षधाम में सबसे ज्यादा ऐसी अस्थियां रखी हैं। इसके अलावा, चांदपोल मोक्षधाम में भी ऐसे अस्थि कलश है, जिनकी कोरोना से मौत होने की वजह से पिछले कई महीनों से मोक्ष के लिए विसर्जन नहीं हो सका। मोक्ष के इंतजार में कोठरी में बंद इन अस्थि कलशों पर धूल की मोटी परत जम गई है। इनमें कुछ अस्थि कलशों पर मृतकों के नाम, उनके गांव का नाम, मौत की दिनांक लिखी है। नाथ गोशाला चेरिटेबल ट्रस्ट के महासचिव आर.के. सारा बताते हैं कि पिछले साल करीब कोरोना से जान गंवा चुके लगभग 1500 शवों का अंतिम संस्कार आदर्श नगर मोक्षधाम में नि:शुल्क किया गया था। दाहसंस्कार के बाद काफी लोग अस्थियां लेने नहीं आए। इनमें काफी ऐसे थे जिन्होंने दोबारा संपर्क तक नहीं किया, न हीं अस्थियों की सुध ली। वहीं, कुछ परिजन जयपुर या इससे बाहर के राज्यों के थे। उन्होंने लॉकडाउन, कोरोना महामारी, कोरोना पॉजिटिव होने से खुद के क्वारंटाइन होने की मजबूरियां बताकर अस्थि कलश बाद में लेने आने को कहा था। लेकिन, वे लोग दोबारा नहीं आए। मृतकों के परिजनों को फोन करेंगे, पत्र लिखेंगे कि सात दिन में कलश ले जाएं। आरके सारा ने बताया कि हम अंतिम प्रयास करेंगे। जिनके फोन नंबर उपलब्ध हैं। उनको फोन करेंगे। अन्यथा संस्था अस्थियों का विधि विधान से विर्सजन कर देगी। अभी पिछले साल के करीब 50 अस्थि कलश आदर्श नगर मोक्षधाम में विसर्जन के इंतजार में हैं। ट्रस्ट के ही वीरेंद्र शर्मा व संजय सैन ने बताया कि पिछले साल मार्च में कोरोना की वजह से मौतों का सिलसिला शुरू हुआ। तब लॉकडाउन लगा हुआ था। ऐसे में मृतकों के परिजन अंतिम संस्कार में शामिल नहीं हो सके। हमें ही अंतिम क्रिया करनी पड़ी। ऐसे में मृतकों के परिजन कहते थे कि हम कोरोना की वजह से अस्थियां लेने नहीं आ सकते हैं, इसलिए आप लोग ही अस्थियां रख लो। हम बाद में आकर ले जाएंगे।