जांबाज़ ‘सिंघम’ को नई चुनौती, राजस्थान से ट्रांसफर के बाद जिम्मेदारी बढ़ी
जयपुर: राजस्थान में अपराधियों के छक्के छुड़ाने वाले और अपनी कड़क कानून व्यवस्था के लिए पहचाने जाने वाले वर्ष 2010 बैच के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी परिस देशमुख (Paris Anil Deshmukh) अब सीमाओं की सुरक्षा का जिम्मा संभालेंगे। 21 मई 2026 को जारी सरकारी आदेश के बाद उन्हें राजस्थान कैडर से रिलीव कर दिया गया है। वे केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर सीमा सुरक्षा बल (BSF) में बतौर डीआईजी (DIG) अपनी नई जिम्मेदारी की शुरुआत करने जा रहे हैं। वे एसी कमरों में बैठने के बजाय खुद ग्राउंड जीरो पर उतरकर ऑपरेशन्स को लीड करने के लिए जाने जाते हैं।
कंप्यूटर इंजीनियर से देश के रखवाले बनने तक का सफर
मूल रूप से महाराष्ट्र के गोंदिया के रहने वाले परिस देशमुख (जन्म 30 जुलाई 1985) शिक्षा के क्षेत्र में हमेशा अव्वल रहे। उन्होंने साल 2007 में एमआईटी से कंप्यूटर इंजीनियरिंग की डिग्री ली। प्रशासनिक सेवा में आने से पहले वे एनआईआईटी (NIIT) में सॉफ्टवेयर ट्रेनर थे, जहाँ उन्होंने नेशनल डिफेंस एकेडमी (NDA) के युवा कैडेट्स को कंप्यूटर की बारीकियां सिखाईं। यहीं से उनके भीतर देश सेवा का जज्बा जागा, जिसके बाद उन्होंने यूपीएससी परीक्षा पास की और उन्हें राजस्थान कैडर मिला।
एनकाउंटर में झेली गोलियां, दंगाइयों के बीच से बचाई मातहतों की जान
आईपीएस परिस देशमुख का पूरा कार्यकाल हैरतअंगेज कारनामों से भरा रहा है। साल 2013 में अलवर के भिवाड़ी में तैनाती के दौरान मुगास्का गांव के पास मेवाती गैंग से मुठभेड़ में चेहरे पर छर्रे लगने के बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और कुख्यात लुटेरों को दबोच लिया। इसी तरह साल 2017 में आनंदपाल एनकाउंटर के बाद नागौर के सांवराद में भड़की हिंसक भीड़ ने जब जीआरपी थाने को घेरकर आग लगाने की कोशिश की, तब तत्कालीन एसपी परिस देशमुख ने खुद पेट्रोल बमों और पथराव के बीच घुसकर अपने पुलिसकर्मियों को सुरक्षित बाहर निकाला था।
खाकी के पीछे छुपा संवेदनशील दिल; शहीद की बहन के विवाह में भरा भात
मैदान पर जितने कड़क हैं, परिस देशमुख अपनी फोर्स के लिए उतने ही भावुक इंसान भी हैं। सांवराद उपद्रव के दौरान नागौर पुलिस के जांबाज कांस्टेबल खुमाराम शहीद हो गए थे। आईपीएस परिस देशमुख इस परिवार के दुख-सुख में हमेशा साथ खड़े रहे। साल 2023 में जब शहीद की बहन संगीता की शादी तय हुई, तो वे राजस्थान की परंपरा के अनुसार खुद 'मायरा' (भात) लेकर शहीद के घर पहुंचे और एक सगे भाई का फर्ज निभाते हुए बहन को आशीर्वाद दिया। उनके इस कदम की पूरे देश में सराहना हुई थी।
फर्जी डिग्री रैकेट का पर्दाफाश और राजस्थान में शानदार रिकॉर्ड
केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर दिल्ली जाने से पहले वे जयपुर में स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप (SOG) में डीआईजी के पद पर तैनात थे, जहां उन्होंने चूरू की ओपीजेएस (OPJS) यूनिवर्सिटी द्वारा चलाई जा रही फर्जी डिग्री की फैक्टरी का पर्दाफाश किया और चांसलर को जेल भेजा।
राजस्थान में अपने 16 साल के शानदार सफर में उन्होंने कई महत्वपूर्ण जिलों की कमान संभाली:
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सीमावर्ती जिलों में एक्शन: बाड़मेर और श्रीगंगानगर में एसपी रहते हुए उन्होंने भारत-पाकिस्तान सीमा पर क्रूड ऑयल चोरी और ड्रोन से होने वाली ड्रग्स तस्करी पर पूरी तरह लगाम लगाई।
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गैंगस्टर्स का खात्मा: सीकर और अलवर में तैनाती के दौरान उन्होंने मेवात की गौ-तस्करी, साइबर ठगी और शेखावाटी के रंगदारी नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया।
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सम्मान: कानून व्यवस्था को चाक-चौबंद रखने और उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों में उनके अदम्य साहस के लिए सरकार ने साल 2024 में उन्हें प्रतिष्ठित 'पुलिस विशेष कर्तव्य पदक' से भी सम्मानित किया था।

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