औपनिवेशिक मानसिकता का प्रतीक था फायसागर का नाम:देवनानी
जयपुर । विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने कहा कि अजमेर के फायसागर का नाम गुलामी का प्रतीक था। यह झील अजमेर के लोगों द्वारा बनाई गई और इसमें सिंधी सहित सभी समुदायों की धार्मिक व सामाजिक आस्था भी जुड़ी हुई है। इसी लिए इसका नाम बदलकर वरूण देव के नाम पर वरूण सागर किया गया है। नाम परिवर्तन से सभी लोगों में हर्ष की लहर है। जल्द ही झील के चहुंमुखी विकास की योजना तैयार कर कांम किया जाएगा।
विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने अजमेर के दिल्ली गेट स्थित झूलेलाल धाम में यह बात कही। यहां सिंधी समुदाय द्वारा फगुणचंड महोत्वस मनाया गया। फायसागर का नाम बदलकर वरूण सागर करने पर सिंधी समुदाय ने देवनानी का अभिनन्दन किया। यहां झूलेलाल कैलेण्डर 2025 का भी विमोचन किया गया।इस अवसर पर देवनानी ने कहा कि वरूण सागर झील अजमेर के लोगों ने खुद श्रमदान कर बनाई थी। गुलामी के दिन थे तो इसका नाम एक अंग्रेज के नाम पर फायसागर रख दिया गया। आजाद भारत में गुलामी के नाम का होना ठीक नहीं है। आमजन की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए इसका नाम बदलकर वरूण देव के नाम पर वरूण सागर किया गया है। यह झील सिंधी व अन्य समुदायों की धार्मिक, सामाजिक व सांस्कृतिक आस्था का केन्द्र है। इसका नाम परिवर्तन होने से विश्व के अलग-अलग हिस्सों में बसे सिंधी समुदाय के लोगों में हर्ष की लहर है।

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