क्या एथेनॉल की वजह से महंगी हुई चीनी? गहलोत के दावे पर सरकार ने दिया जवाब
जयपुर। राजस्थान में सरकारी स्कूल भवनों की जर्जर हालत और बुनियादी सुविधाओं के अभाव को लेकर विधानसभा में बड़ा खुलासा हुआ है। यू-डाइस डेटा के आधार पर सामने आए आंकड़ों के अनुसार प्रदेश के कई स्कूलों में भवनों, शौचालयों और पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाओं की भारी कमी है।
बुनियादी सुविधाओं का अभाव
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भवन विहीन स्कूल: प्रदेशभर में 611 सरकारी स्कूल ऐसे हैं, जिनके पास अपने भवन नहीं हैं, जिनमें 10 बालिका विद्यालय भी शामिल हैं। इस सूची में झालावाड़ (67), जोधपुर (42), और जयपुर (38) सबसे आगे हैं।
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शौचालय विहीन स्कूल: करीब 2,047 स्कूलों में विद्यार्थियों के लिए शौचालयों की सुविधा नहीं है, जिसमें बांसवाड़ा (188) और डूंगरपुर (124) शीर्ष जिलों में शामिल हैं।
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पेयजल की समस्या: लगभग 1,049 विद्यालयों में बच्चों को पीने के पानी के लिए जूझना पड़ रहा है, जिसमें दौसा (96) और उदयपुर (70) सबसे अधिक प्रभावित हैं। इस मामले में भी बांसवाड़ा के हालात सबसे ज्यादा चिंताजनक हैं, जो तीनों ही श्रेणियों (भवन, शौचालय और पेयजल) के संकट में टॉप-5 में शामिल है।
सरकार की ओर से सुधार के प्रयास
विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष के सवाल के जवाब में सरकार ने स्पष्ट किया है कि जिन स्कूलों में पेयजल या शौचालय की कमी है, वहां वैकल्पिक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जा रही हैं। इसके अलावा माध्यमिक शिक्षा के तहत बजट घोषणा के अनुसार:
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स्कूलों की मरम्मत और जीर्णोद्धार के लिए 550 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं।
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भवनहीन और जर्जर विद्यालयों के निर्माण के लिए 450 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
इंफ्रास्ट्रक्चर सुधार के लिए बड़ा खाका
वित्त विभाग द्वारा तैयार की गई कार्ययोजना के तहत राज्य में जर्जर और जीर्ण-शीर्ण स्कूल भवनों के निर्माण, रिपेयर और मेंटेनेंस के लिए अगले पांच वर्षों में 12,500 करोड़ रुपये (हर साल 2,500 करोड़ रुपये) खर्च करने का बड़ा खाका तैयार किया गया है।

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