जयपुर: जयपुर के राजकीय सेठ आनंदीलाल पोद्दार बधिर उच्च माध्यमिक विद्यालय में छात्रों की शिकायतों और कथित कुप्रबंधन का मामला तूल पकड़ने के बाद सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली समेत कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता बुधवार को विद्यालय पहुंचे और वहां अध्ययनरत विद्यार्थियों से मिलकर उनकी समस्याएं सुनीं। इस घटनाक्रम के बाद सोशल मीडिया पर भी सरकार को तीखी प्रतिक्रियाओं का सामना करना पड़ा।

विपक्ष के दौरे और सोशल मीडिया पर बढ़ते दबाव का असर

विद्यार्थियों द्वारा विद्यालय की व्यवस्थाओं को लेकर किए गए विरोध प्रदर्शन के बाद यह मामला लगातार चर्चा में बना हुआ था। विपक्षी नेताओं ने सरकार पर मूक-बधिर विद्यार्थियों की समस्याओं के प्रति उदासीनता बरतने का आरोप लगाया। इसके साथ ही इंटरनेट मीडिया पर स्कूल की व्यवस्थाओं से जुड़े वीडियो और पोस्ट तेजी से वायरल होने लगे, जिससे प्रशासनिक हलकों में हलचल मच गई और सरकार पर तुरंत एक्शन लेने का दबाव काफी बढ़ गया।

शिक्षा विभाग द्वारा उच्च स्तरीय जांच समिति का गठन

बढ़ते दबाव के बीच संयुक्त निदेशक, स्कूल शिक्षा (जयपुर संभाग) ने त्वरित कदम उठाते हुए मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी, जयपुर पूर्व की अध्यक्षता में एक जांच दल का गठन किया है। इस जांच दल को पूरे प्रकरण की गहराई से पड़ताल करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही, इस पूरी जांच रिपोर्ट को तय समय सीमा के भीतर सौंपने और दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई का प्रस्ताव भेजने के भी निर्देश दिए गए हैं।

पूर्व प्रधानाचार्य भारत जोशी को तत्काल प्रभाव से किया निलंबित

प्रशासनिक स्तर पर कड़ी कार्रवाई करते हुए शिक्षा विभाग ने विद्यालय के पूर्व प्रधानाचार्य भारत जोशी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। हालांकि उनका हाल ही में जिला शिक्षा अधिकारी के रूप में पदोन्नति के साथ अन्यत्र स्थानांतरण हो चुका था, लेकिन विद्यालय में सामने आए कुप्रबंधन के गंभीर आरोपों के चलते उनके खिलाफ राजस्थान सिविल सेवा नियमों के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की गई है। निलंबन काल के दौरान उनका मुख्यालय माध्यमिक शिक्षा निदेशालय, बीकानेर तय किया गया है।