फ्लोर टेस्ट में थलापति विजय की बड़ी जीत, TVK को 144 विधायकों का समर्थन
चेन्नई: तमिलनाडु की राजनीति में बुधवार का दिन मुख्यमंत्री विजय और उनकी पार्टी तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) के लिए बड़ी जीत लेकर आया। विधानसभा में हुए 'फ्लोर टेस्ट' के दौरान विजय सरकार ने भारी बहुमत से विश्वास मत हासिल कर लिया। 234 सदस्यीय विधानसभा में सरकार के पक्ष में 144 वोट पड़े, जबकि विरोध में केवल 22 विधायकों ने मतदान किया। 5 सदस्यों ने वोटिंग की प्रक्रिया में हिस्सा नहीं लिया। इस जीत के साथ ही राज्य में चल रही राजनीतिक अनिश्चितता पर विराम लग गया है।
इन दलों ने दिया विजय सरकार का साथ
विश्वास मत के दौरान न केवल सहयोगी दलों ने, बल्कि कई विपक्षी गुटों ने भी विजय सरकार के प्रति भरोसा जताया:
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धर्मनिरपेक्ष दलों का समर्थन: कांग्रेस, सीपीआईएम (CPI-M), सीपीआई (CPI) और वीसीके (VCK) ने मजबूती से सरकार का साथ दिया।
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VCK की विशेष मांग: वीसीके विधायक वन्नी अरसु ने समर्थन के साथ ही सरकार से मांग की कि महाराष्ट्र और कर्नाटक की तर्ज पर तमिलनाडु में भी अंधविश्वास विरोधी कानून लागू किया जाए।
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IUML का रुख: आईयूएमएल ने सरकार की शुरुआती कार्यशैली और विशेष रूप से 717 शराब की दुकानों को बंद करने के फैसले की सराहना करते हुए समर्थन दिया।
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व्यक्तिगत समर्थन: एएमएमके (AMMK) से निष्कासित विधायक एस. कामराज ने भी विजय के पक्ष में मतदान किया।
AIADMK में दिखी बड़ी फूट
फ्लोर टेस्ट के दौरान सबसे ज्यादा चर्चा मुख्य विपक्षी दल एआईएडीएमके (AIADMK) के भीतर मचे घमासान की रही:
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बगावती गुट: वरिष्ठ नेता एसपी वेलुमणि और सीवे शनमुगम के नेतृत्व में एआईएडीएमके के लगभग 30 विधायकों के एक गुट ने पार्टी प्रमुख एडप्पादी के पलानीस्वामी (EPS) के निर्देशों के खिलाफ जाकर सरकार का समर्थन किया।
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आधिकारिक रुख: पलानीस्वामी के प्रति निष्ठा रखने वाले धड़े ने सरकार के खिलाफ वोट दिया और बागी विधायकों को चेतावनी दी कि पार्टी के व्हिप का उल्लंघन करने पर उन पर दलबदल विरोधी कानून के तहत कार्रवाई की जाएगी।
DMK का वॉकआउट और आपत्ति
द्रमुक (DMK) ने सदन की कार्यवाही के दौरान तीखा रुख अपनाया:
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मुद्दे: विधायक थामिमुन अंसारी ने 'विशेष ड्यूटी अधिकारी' की नियुक्ति पर सवाल उठाए, वहीं एमएच जवाहरुल्लाह ने मांग की कि सरकारी कार्यक्रमों में तमिल राष्ट्रगान को सर्वोच्च स्थान मिले।
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फैसला: शराबबंदी के फैसले की तारीफ करने के बावजूद, अन्य आपत्तियों के चलते डीएमके विधायकों ने मतदान से पहले ही सदन से वॉकआउट कर दिया।
बीजेपी और पीएमके का रुख
अन्य प्रमुख दलों ने इस मतदान से दूरी बनाए रखी:
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भाजपा (BJP): पार्टी ने इस पूरी कार्यवाही में 'तटस्थ' (Neutral) रहने का फैसला किया।
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पीएमके (PMK): सौम्या अंबुमणि के नेतृत्व में पीएमके के चार विधायकों ने मतदान की प्रक्रिया में भाग नहीं लिया और इससे दूर रहे।

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