उदयपुर। लेक सिटी उदयपुर में 17 और 18 मार्च को पश्चिम क्षेत्र का बड़ा कुलपति सम्मेलन आयोजित होगा। यह सम्मेलन जनार्दन राय नागर राजस्थान विद्यापीठ यूनिवर्सिटी में होगा। एसोसिएशन ऑफ इंडियन यूनिवर्सिटीज (AIU) की ओर से आयोजित इस दो दिवसीय ‘पश्चिम क्षेत्र कुलपति सम्मेलन 2025-26’ में शिक्षा जगत की प्रमुख हस्तियां हिस्सा लेंगी।

राज्यपाल करेंगे उद्घाटन

सम्मेलन का उद्घाटन राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े किशनराव करेंगे। उद्घाटन समारोह 17 मार्च को सुबह 10 बजे विद्यापीठ परिसर में आयोजित होगा। इस मौके पर राजस्थान सरकार में राज्य मंत्री डॉ. मंजू बाघमार और प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्य गौरव वल्लभ विशेष अतिथि के रूप में मौजूद रहेंगे। सम्मेलन का मुख्य विषय ‘स्वदेशी, आर्थिक राष्ट्रवाद और तकनीकी राष्ट्रवाद के जरिए आत्मनिर्भर भारत’ रखा गया है। इस विषय पर देशभर के शिक्षाविद् गहन मंथन करेंगे। सम्मेलन में गुजरात, राजस्थान, महाराष्ट्र और गोवा की लगभग 120 कुलपति प्रत्यक्ष रूप से शामिल होंगे, जबकि 100 से अधिक कुलपति ऑनलाइन माध्यम से जुड़ेंगे। सम्मेलन की अध्यक्षता विनायक कुमार पाठक करेंगे, जो AIU के अध्यक्ष भी हैं। वहीं, AIU की महासचिव पंकज मित्तल सम्मेलन के संचालन की जिम्मेदारी संभालेंगी।

विश्वविद्यालय की ओर से स्वागत

मेजबान विश्वविद्यालय के कुलपति S. S. सारंगड़ेवोत ने बताया कि सम्मेलन के दौरान राज्यपाल ‘यूनिवर्सिटी न्यूज’ के विशेष अंक का विमोचन भी करेंगे। सम्मेलन में स्वदेशी शिक्षा प्रणाली, रिसर्च और डेवलपमेंट, आर्थिक मजबूती जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर गहन चर्चा होगी।

समापन सत्र

दो दिवसीय सम्मेलन का समापन 18 मार्च को होगा। समापन सत्र में वासुदेव देवनानी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। इस सत्र में बौद्धिक प्रकोष्ठ के राज्य संयोजक राजेंद्र सिंह शेखावत, शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के राष्ट्रीय सचिव अतुल कोठारी और AICTE, NAAC और ICAR जैसे प्रमुख संस्थानों के प्रतिनिधि भी अपने विचार साझा करेंगे।

AIU और विद्यापीठ का गौरवशाली इतिहास

एसोसिएशन ऑफ इंडियन यूनिवर्सिटीज की स्थापना वर्ष 1925 में हुई थी। इसके नेतृत्व में सर्वेपल्ली राधाकृष्णन और श्यामा प्रसाद मुखर्जी जैसे महान व्यक्तित्व आ चुके हैं। वर्तमान में इस संस्था से देश की 1147 से अधिक यूनिवर्सिटीज जुड़ी हुई हैं। जनार्दन राय नागर राजस्थान विद्यापीठ यूनिवर्सिटी की स्थापना वर्ष 1937 में शिक्षा मनीषी जनार्दन राय नागर ने की थी। आज यह विश्वविद्यालय शिक्षा, शोध और सामाजिक विकास के कई क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।